जी20 में भारत की बड़ी पहल, जयशंकर बोले- नौवहन सुरक्षा और नाविकों की रक्षा के लिए हो सामूहिक प्रतिबद्धता
भारत रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संघर्ष से प्रभावित वैश्विक नौवहन मार्गों तथा नाविकों की सुरक्षा को जी20 घोषणा पत्र में शामिल कराने पर जोर दे रहा है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर।
HighLights
भारत जी20 घोषणा पत्र में नौवहन सुरक्षा शामिल कराना चाहता है।
वैश्विक संघर्षों से समुद्री मार्ग और नाविक खतरे में हैं।
ग्लोबल साउथ पर ईंधन, खाद्य आपूर्ति का असमान बोझ।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध और उसके बाद पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष ने वैश्विक नौवहन मार्गों को खतरे में डाल दिया है। लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर नागरिक जहाजों पर हमले लगातार हो रहे हैं, जिससे ईंधन, खाद्यान्न और उर्वरकों की आपूर्ति बाधित हो रही है।
इन हमलों से पैदा होने वाले खतरों को भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर लगभग हर वैश्विक मंच पर नौवहन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते आए हैं। अब भारत की कोशिश है कि दिसंबर में होने वाली जी20 शिखर बैठक के बाद जारी होने वाले संयुक्त घोषणा पत्र में नौवहन और जहाजों पर काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा पर सामूहिक प्रतिबद्धता दर्ज हो।
इस दिशा में विदेश मंत्री जयशंकर ने अटलांटा में हुई जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में साफ संकेत दिए हैं। अटलांटा में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में आयोजित बैठक की पहली प्लेनरी में जयशंकर ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के सामने सैन्य समाधान काम नहीं करेंगे और कूटनीति को मौका दिया जाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि नागरिक जहाजरानी और नाविकों पर हमलों के परिणाम ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील व गरीब देशों) को असमान रूप से भुगतना पड़ रहा है, जिससे ईंधन, खाद्य पदार्थ और उर्वरकों की उपलब्धता तथा कीमतें खतरे में पड़ रही हैं।
उन्होंने नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने और अंतरराष्ट्रीय कानून, खासकर समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) के तहत हमलों को तत्काल रोकने की तत्काल जरूरत बताई। जयशंकर ने यह भी बताया कि नाविकों की सुरक्षा के लिए भारत और लाइबेरिया ने एक संयुक्त पहल शुरू की है।
भारत यह मुद्दा इसलिए उठा रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में फरवरी से जारी संघर्ष में अब तक कम से कम 22 भारतीय नागरिकों की जान जा चुकी है, जिनमें 14 नाविक शामिल हैं। भारत की अर्थव्यवस्था ऊर्जा, खाद और उर्वरकों के समुद्री आयात पर निर्भर है।
जहाजों पर हमले और मार्गों की बाधा से न सिर्फ आयात महंगा पड़ता है, बल्कि भारतीय नाविकों की जान और आजीविका भी खतरे में पड़ती है। ग्लोबल साउथ के देशों पर इसका असमान बोझ पड़ता है। ऐसे में भारत चाहता है कि जी20 जैसे मंच पर सामूहिक रूप से नौवहन सुरक्षा और नाविकों के हितों की रक्षा का संदेश जाए, ताकि समुद्री व्यापार सुरक्षित और सुचारु बना रहे।
जी20 शिखर बैठक 14-15 दिसंबर 2026 को अमेरिका के मियामी (फ्लोरिडा) में ट्रंप नेशनल डोरल मियामी में हो रही है, जिसकी मेजबानी अमेरिका कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसमें शामिल होने की संभावना है। वे दिसंबर में कनाडा की यात्रा के बाद अमेरिका पहुंचकर इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
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