भारत-न्यूजीलैंड FTA लागू, MSME से सर्विस सेक्टर तक दोनों देशों को मिलेंगे कई फायदे
भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता लागू हो गया है, जिससे भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।

FTA लागू होने से भारतीय उत्पादों को शुल्क-मुक्त पहुंच

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मंगलवार से लागू हो गया। इससे कपड़ा, चमड़ा और जूते-चप्पल जैसे श्रम प्रधान क्षेत्रों सहित विभिन्न भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी।
इतना ही नहीं इंजीनियरिंग सामान बनाने वाले एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) इससे लाभान्वित हो सकते हैं। समझौते के तहत भारतीय निर्यात की सभी शुल्क श्रेणियों को पहले दिन से शुल्क मुक्त पहुंच प्रदान की गई है।
दोनों देशों ने इस समझौते पर 27 अप्रैल, 2026 को हस्ताक्षर किए थे। इसके लिए बातचीत वर्ष 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन 2015 में वार्ता रुक गई थी। मार्च, 2025 में दोनों देशों ने बातचीत फिर शुरू की, जिसके बाद समझौते को अंतिम रूप दिया गया।
FTA लागू होने से भारतीय उत्पादों को शुल्क-मुक्त पहुंच
डेलाइट इंडिया के पार्टनर गुलजार दिदवानिया ने कहा कि इस समझौते से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) का प्रवाह बढ़ने की उम्मीद है।
हालांकि, निवेश में वास्तविक वृद्धि कितनी होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है और काफी हद तक निजी क्षेत्र के निवेश संबंधी निर्णयों पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ने अगले 15 साल में भारत में 20 अरब डालर के एफडीआई की प्रतिबद्धता जताई है।
दिदवानिया के मुताबिक, कुछ कच्चे माल पर शुल्क मुक्त पहुंच, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सुगम बनाने और निवेश को बढ़ावा देने वाली व्यवस्थाओं से दोनों देशों के बीच वैल्यू चेन का एकीकरण मजबूत हो सकता है।
इससे निवेश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने में भी मदद मिलेगी। पिछले पांच साल में लागू होने वाला यह सातवां व्यापार समझौता पिछले पांच साल में लागू होने वाला यह भारत का सातवां व्यापार समझौता है।
इससे पहले भारत ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मारीशस, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए), ब्रिटेन, ओमान और आस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते लागू किए हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच समझौता लागू होने के साथ ही देश के प्रभावी मुक्त व्यापार समझौतों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है।
समझौता लागू होने से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में भारत की तरजीही पहुंच का दायरा और व्यापक हुआ है। न्यूजीलैंड एक मुक्त अर्थव्यवस्था है और भारत ने इस समझौते के जरिये आयुष, योग प्रशिक्षकों तथा विद्यार्थियों की आवाजाही जैसे सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुंच के नए अवसर हासिल किए हैं। इसमें पढ़ाई के बाद कार्य वीजा से जुड़े अवसर भी शामिल हैं।
पिछले साल द्विपक्षीय व्यापार 11 प्रतिशत घटा
भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025-26 में करीब 11 प्रतिशत घटकर 1.15 अरब डालर रहा है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 1.3 अरब डालर था।
इस दौरान भारत का न्यूजीलैंड को निर्यात 56.65 करोड़ डालर रहा, जबकि आयात 58.91 करोड़ डालर था। इस तरह भारत को 2.25 करोड़ डालर का व्यापार घाटा हुआ।
समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाएगा
लक्सन समझौते के अमल में आने के बाद न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि इससे न्यूजीलैंड के कारोबारियों के लिए शुल्क में भारी कमी के साथ एक अरब से अधिक नए ग्राहकों तक पहुंचना संभव हो गया है।
इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में लक्सन ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ मिलकर काम करते हुए हमने एक ऐसा समझौता किया है जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ाने में मदद करेगा।
समझौते से न्यूजीलैंड के लोगों के लिए अधिक नौकरियां पैदा होंगी और बेहतर वेतन मिलेगा। इससे न्यूजीलैंड के समुदायों में अधिक पैसा आएगा।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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