कौन थे राजा रवि वर्मा जिनकी महंगी पेंटिंग की हो रही चर्चा? एमएफ हुसैन का रिकॉर्ड भी किया ध्वस्त
राजा रवि वर्मा की 'यशोदा और कृष्ण' पेंटिंग 167.2 करोड़ रुपये में बिककर सबसे महंगी भारतीय पेंटिंग बन गई है। ...और पढ़ें

राष्ट्रीय धरोहर बनी राजा रवि वर्मा की पेंटिंग 167.2 करोड़ में बिकी (फोटो सोर्स- सैफ्रनआर्ट वेबसाइट)
HighLights
राजा रवि वर्मा भारतीय चित्रकला के पितामह माने जाते हैं।
राजा रवि वर्मा का 1848 में केरल में हुआ था जन्म
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय कला जगत में एक एतिहासिक रिकॉर्ड बना है। मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा की पेंटिंग 'यशोदा और कृष्ण' अब तक की सबसे महंगी भारतीय पेंटिंग बन गई है, जिसे 167.2 करोड़ रुपये में खरीदा गया।
यह पेंटिंग मुंबई में हुई सैफ्रनआर्ट की नीलामी में बेची गई, जहां करीब सात मिनट तक चली तेज बोली के बाद यह रिकॉर्ड कीमत पर पहुंची। इससे पहले सबसे महंगी भारतीय पेंटिंग का रिकॉर्ड एम एफ हुसैन की 'ग्राम यात्रा' के नाम था, जो 118 करोड़ रुपये में बिकी थी।
साइरस पूनावाला ने खरीदी पेंटिंग
इस ऐतिहासिक पेंटिंग को सीरम इंस्टीट्यूट के संस्थापक साइरस एस पूनावाला ने खरीदा है। उन्होंने इसे सिर्फ निजी संग्रह नहीं, बल्कि 'राष्ट्रीय धरोहर' बताया है। पूनावाला ने कहा कि इस पेंटिंग को समय-समय पर जनता के लिए प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि लोग भी इसे देख सकें। उनकी इस खरीद को भारतीय कला बाजार के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
'यशोदा और कृष्ण' 1890 के दशक की पेंटिंग है, जो भागवत पुराण के एक प्रसंग को दर्शाती है। इसमें मां यशोदा और बाल कृष्ण के बीच का एक भावनात्मक पल दिखाया गया है। इस पेंटिंग में रोशनी और छाया का शानदार इस्तेमाल किया गया है, जो इसे और भी खास बनाता है। कला विशेषज्ञों के अनुसार, यह पेंटिंग भारतीय कला की 'मोनालिसा' जैसी मानी जाती है।
कौन थे राजा रवि वर्मा?
राजा रवि वर्मा भारतीय चित्रकला के पितामह माने जाते हैं, जिन्होंने भारतीय साहित्य और संस्कृति के पात्रों का चित्रण किया। उनकी कला ने भारतीय चित्रकला को एक नई दिशा दी है। उनकी पेंटिंग 'यशोदा और कृष्ण' को सीरम इंस्टीट्यूट के संस्थापक साइरस एस पूनावाला ने खरीदा है, जो इसे राष्ट्रीय धरोहर मानते हैं। 1848 में जन्मे राजा रवि वर्मा ने हिंदू देवी-देवताओं और पौराणिक दृश्यों को शाही, मानवीय आकृतियों के रूप में, भव्य वेशभूषा में चित्रित करने के तरीके ने देश की पेंटिंग में नई पहचान दी।
भारतीय कला बाजार को मिला बड़ा बढ़ावा
इस रिकॉर्ड बिक्री को भारतीय कला बाजार के लिए एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारतीय कला को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की बिक्री से यह साबित होता है कि भारतीय कला सिर्फ सौंदर्य ही नहीं, बल्कि एक मजबूत निवेश भी बनती जा रही है। यह रिकॉर्ड आने वाले समय में पूरे कला बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है और नई ऊंचाइयां तय कर सकता है।
