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अमेरिकी नेतृत्व वाले 'पैक्स सिलिका' में भारत की एंट्री, क्या है ये और कैसे होगा फायदा?

By Jaiprakash RanjanEdited By: Shubham Tiwari
Published: Fri, 20 Feb 2026 11:29 AM (IST)Updated: Fri, 20 Feb 2026 12:36 PM (IST)

भारत अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका में शामिल हो गया है। इसका उद्देश्य एआई युग में आर्थिक सुरक्षा मजबूत ...और पढ़ें

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जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। ट्रेड डील को लेकर चल रही असमंजसता को दूर करने के बाद भारत और अमेरिका के संबंधों में दिनों-दिन नए भरोसे का संचार हो रहा है। इस क्रम में भारत ने शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल होने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर कर दिया।

चीन पर कम होगी निर्भरता

यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और दुर्लभ खनिजों की सुरक्षित, मजबूत और विश्वसनीय सप्लाई चेन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। चूंकि अभी तक दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति, शोधन व खनन में पूरी दुनिया चीन पर निर्भर है। ऐसे में पैक्स सिलिका अमेरिका अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया एक नया अभियान है ताकि चीन के उपर निर्भरता ना रहे।

कौन-कौन से देश शामिल?

  • ऑस्ट्रेलिया
  • ग्रीस
  • इजराइल
  • जापान
  • कतर
  • दक्षिण कोरिया
  • सिंगापुर
  • संयुक्त अरब अमीरात
  • यूनाइटेड किंगडम


एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में समझौते पर हस्ताक्षर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किए, जबकि अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और आर्थिक मामलों के लिए अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट जैकब हेलबर्ग भी इस समारोह में मौजूद थे।

क्या बोले अमेरिकी अधिकारी?

अमेरिका के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने भारत के सहयोग को 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को परिभाषित करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि पैक्स सिलिका इस विश्वास की घोषणा है कि भविष्य उन्हीं देशों का है जो निर्माण क्षमता विकसित करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर सहयोग को आगे बढ़ाते हैं।

वाशिंगटन में हुई पहल

पैक्स सिलिका की पहल दिसंबर 2025 में वाशिंगटन में की गई थी। इसकी पहली बैठक अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेट्री की अगुवाई में हुई थी जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व कैबिनेट मंत्री वैष्णव ने किया था। उसके बाद हाल ही में इसकी एक और बैठक अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बुलाई थी जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हिस्सा लिया था।

क्या है मकसद?

यह गठबंधन महत्वपूर्ण खनिजों से लेकर सेमीकंडक्टर और एआइ इंफ्रास्ट्रक्चर तक पूरी सप्लाई चेन में गहन आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य पारस्परिक समृद्धि, सुरक्षा और एआइ आधारित विकास सुनिश्चित करना है।

क्या होंगे फायदे?

भारत की इस गठबंधन में शामिल होने से दोनों देशों के बीच संबंधों में नई गति आई है, खासकर पिछले कुछ समय की तनावपूर्ण स्थिति के बाद। माना जाता है कि पैक्स सिलिका में भारत का शामिल होना प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और अन्य द्विपक्षीय सहयोग आगे बढ़ाने के प्रयासों के साथ जुड़ा हुआ है।

वैष्णव ने इस अवसर पर कहा कि भारत पैक्स सिलिका का हिस्सा बन गया है। इससे भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को बहुत फायदा होगा। भारत में पहले से ही 10 प्लांट स्थापित हो चुके हैं और कई और स्थापित होने की प्रक्रिया में हैं। जल्द ही पहला सेमीकंडक्टर प्लांट कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू करेगा। एक पूरा इकोसिस्टम उभर रहा है। पैक्स सिलिका इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भारत के युवाओं को इससे लाभ मिलेगा।

पैक्स सिलिका घोषणा-पत्र में कहा गया है कि हम निवेश सुरक्षा प्रथाओं, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोत्साहनों पर साझा प्रयासों के माध्यम से अपनी आर्थिक साझेदारी को गहरा करने की साझा दृष्टि रखते हैं। हम वैश्विक प्रौद्योगिकी सप्लाई चेन के रणनीतिक हिस्सों पर साझेदारी को प्रोत्साहित करते हैं, जिनमें सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन्स और प्लेटफॉर्म, फ्रंटियर फाउंडेशन मॉडल्स, सूचना कनेक्टिविटी और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर कंप्यूट, सेमीकंडक्टर, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, परिवहन लॉजिस्टिक्स, मिनरल रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग, ऊर्जा शामिल है लेकिन सहयोग इन क्षेत्रों से बाहर का भी हो सकता है।

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