नई दिल्‍ली, जेएनएन। कुछ महीने पहले भारत कोरोना के टीके की कमी से जूझ रहा था। हालात ऐसे थे कि टीका लगवाने के लिए स्लाट मिलना मुश्किल हो रहा था। उस दौरान कई टेक कंपनियों ने एप बनाकर स्लाट खोजने में लोगों की मदद की थी। आज यह तस्वीर बदल गई है। देश में रोजाना 80-90 लाख टीके लग रहे हैं। अधिकारियों को भरोसा है कि दिसंबर तक पूरी वयस्क आबादी को टीका लगाने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।

निजी स्तर पर सक्रिय रहे स्वास्थ्य मंत्री: जुलाई में स्वास्थ्य मंत्रलय की जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने टीका उत्पादन को लेकर निजी तौर पर सक्रियता दिखाई। करीबी सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय मंत्री ने दैनिक आधार पर वैक्सीन निर्माता कंपनियों से बात की और उनकी समस्याओं को दूर करने में तत्परता दिखाई। टीका उत्पादक कंपनियों को फंडिंग से लेकर अन्य राजनयिक मोर्चे पर पूरा सहयोग मिला। सरकार ने कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। अमेरिका से कच्चा माल पाने के लिए सरकार ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी जरूरी कदम उठाए।

सीरम इंस्टीट्यूट का बेहतर प्रदर्शन: टीके की उपलब्धता की तस्वीर बदलने में बहुत बड़ा योगदान सीरम इंस्टीट्यूट का रहा। सीरम इंस्टीट्यूट ने सरकार की उम्मीदों से भी ज्यादा तेजी से टीका बनाया है। सरकार ने मई में कहा था कि अगस्त से दिसंबर के बीच सीरम इंस्टीट्यूट कोविशील्ड की 75 करोड़ डोज बनाएगा। अब यह अनुमान 90 करोड़ डोज का है। कंपनी ने बहुत तेजी से अन्य टीकों के लिए स्थापित केंद्रों का इस्तेमाल कोविशील्ड के उत्पादन में किया है। अप्रैल में कंपनी के पास कोविशील्ड के निर्माण के लिए दो प्रोडक्शन लाइन थी, जिनकी संख्या आज पांच हो गई है। प्रतिमाह उत्पादन क्षमता 21.5 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। पिछले महीने सीरम ने कोविशील्ड की 15 करोड़ डोज उपलब्ध कराई थी। इस महीने यह संख्या 20 करोड़ रहने का अनुमान है।

उत्पादन में नंबर एक देश है भारत: टीका उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का नंबर एक देश है। सीरम इंस्टीट्यूट में कोविशील्ड और भारत बायोटेक में कोवैक्सीन का निर्माण किया जा रहा है। अन्य फर्म बायोलाजिकल ई जानसन एंड जानसन के टीके की बाटलिंग का काम कर रही है। सालाना टीका बनाने की इन सबकी संयुक्त क्षमता तीन अरब तक पहुंचने का अनुमान है।

अब निर्यात की तैयारी: अप्रैल में दूसरी लहर के दौरान सरकार ने टीका निर्यात रोक दिया था। अब इसे फिर शुरू करने की तैयारी है। अक्टूबर से चरणबद्ध तरीके से टीका निर्यात शुरू हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ के तहत पिछड़े देशों के लिए इस साल दो अरब डोज की आपूर्ति का लक्ष्य तय किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनीसेफ और सीईपीआइ के साथ मिलकर टीका आपूर्ति की दिशा में काम कर रहे गावी (ग्लोबल अलायंस फार वैक्सीन एंड इम्युनाइजेशन) ने हाल ही में टीका आपूर्ति के इस लक्ष्य को 30 फीसद घटाते हुए 1.425 अरब डोज कर दिया था। भारत की ओर से फिर निर्यात शुरू करने के एलान का गावी ने स्वागत किया है।

Edited By: Sanjay Pokhriyal