हरियाली घटने से तपने लगा देश, 25 सालों में 5.6 प्रतिशत सिकुड़ा ग्रीन कवर; क्लाइमेट ट्रेंड्स का चौंकाने वाला खुलासा
क्लाइमेट ट्रेंड्स के अध्ययन के अनुसार, 2001 से 2025 के बीच भारत में हरियाली वाले क्षेत्र में 5.6% की कमी ...और पढ़ें

2001-2025 में भारत में हरियाली 5.6% घटी

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली स्थित जलवायु अनुसंधान संगठन क्लाइमेट ट्रेंड्स के अध्ययन में सामने आया कि 2001 से 2025 के बीच भारत में ग्रीन कवर (हरियाली वाले क्षेत्र) में कमी आई है, जबकि नान-ग्रीन (बिना हरियाली वाले) क्षेत्रों में 5.6 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई है। इस बदलाव ने पूरे देश में गर्मियों के तापमान को बढ़ाने में योगदान दिया है।
क्लाइमेट ट्रेंड्स द्वारा सोमवार को जारी विश्लेषण में कहा गया है, 'इन दोनों तरह के क्षेत्रों (2001 से 2025 के बीच) में गर्मियों के औसत तापमान के बीच लगभग एक से 2.5 डिग्री सेल्सियस का अंतर देखा गया। यह दर्शाता है कि जमीन की सतह के तापमान को नियंत्रित करने में पेड़-पौधों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।'
भारत में हरियाली 5.6% कम हुई
अध्ययन के अनुसार, भारत में हरियाली वाला क्षेत्र 2001 में लगभग 36.95 प्रतिशत था, जो 2025 में घटकर 31.35 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि के दौरान, 'बिना हरियाली वाला जमीन का हिस्सा 63.05 प्रतिशत से बढ़कर 68.65 प्रतिशत हो गया।
यह दर्शाता है कि देश के बड़े हिस्सों में मानवीय गतिविधियों के कारण या बहुत कम वनस्पतियों वाली जमीन का विस्तार लगातार हो रहा है।
क्लाइमेट ट्रेंड्स के वरिष्ठ अध्ययनकर्ता डॉ पलक बाल्यान ने कहा, "ये नतीजे स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि पेड़-पौधे केवल एक पारिस्थितिक संपत्ति नहीं हैं, बल्कि ये भारत के जलवायु-अनुकूलन बुनियादी ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
पेड़-पौधे स्थानीय तापमान करते हैं कंट्रोल
हरियाली वाले और बिना हरियाली वाले क्षेत्रों के बीच गर्मियों के तापमान में लगातार एक से 2.5 डिग्री सेल्सियस का अंतर यह बताता है कि पेड़-पौधे वाष्पोत्सर्जन, छाया देने और नमी बनाए रखने के जरिए स्थानीय तापमान को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।'
अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन क्षेत्रों में हरियाली कम हुई है, वहां गर्मियों में तापमान में अधिक वृद्धि देखी गई है। हालांकि, तापमान बढ़ने के पीछे क्षेत्रीय जलवायु कारकों का भी प्रभाव रहा है।
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