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ठंड की दस्तक के बीच राजस्थान के 14 और गुजरात के 4 जिले सूखाग्रस्त घोषित, सामान्य से कम बारिश के चलते फसलें बर्बाद

Published: Mon, 26 Oct 2026 09:20 PM (IST)Updated: Mon, 26 Oct 2026 09:26 PM (IST)

राजस्थान के 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है, जहां बारिश की कमी और भूजल स्तर में गिरावट के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

राजस्थान के 14 जिले और 80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित

राजस्थान के 14 जिले और 80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित

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जागरण संवाददाता, जयपुर। दीपावली से पहले जहां उत्तर भारत के राज्यों में ठंड ने दस्तक दे दी है, वहीं राजस्थान में सूखे का खतरा मंडराने लगा है। इस बीच राज्य आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग ने प्रदेश के 14 जिलों की 80 तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया है।

इनमें जोधपुर जिले की 12 तहसील, जालौर व बाड़मेर की 10-10, बालोतरा की नौ, जैसलमेर, डूंगरपुर और फलौदी की सात-सात, पाली की आठ, बांसवाड़ा तीन, ब्यावर, चूरू एवं बीकानेर की दो-दो एवं नागौर व सिरोही जिले की एक-एक तहसील शामिल है।

राजस्थान के 14 जिले और 80 तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित

इस संबंध में रविवार को अधिसूचना जारी की गई है। आपदा प्रबंधन एवं राहत विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सूखाग्रस्त घोषित किए गए क्षेत्रों में संबंधित कानूनी प्रविधान अधिसूचना प्रकाशन की तारीख से आगामी 6 महीने तक लागू रहेंगे।

सरकार ने बारिश की कमी, भूजल स्तर में गिरावट, सतही जल की उपलब्धता और फसलों के नुकसान का वैज्ञानिक आकलन करने के बाद यह निर्णय लिया है। बता दें कि पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में खड़ी फसलें सूख गईं और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।

बता दें कि राजस्थान में 575 मिलीमीटर औसत वार्षिक वर्षा होती है। बता दें कि राज्य की भौगोलिक स्थिति और अरावली पर्वतमाला के कारण राज्य में बारिश का वितरण बहुत ही असमान है।

जहां एक तरफ दक्षिण भाग में 600 मिलीमीटर व पूर्वी भाग में 649 मिलीमीटर बारिश होती है, वहीं पश्चिमी मरुस्थलीय इलाकों में बारिश बहुत कम (327 मिलीमीटर) होती है।

आपदा प्रबंधन विभाग ने 6 महीने के लिए प्रावधान लागू किए

हालांकि, इस वर्ष मानसून में 358 एमएम बारिश हुई है, जो सामान्य से 43 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष सबसे कम बारिश प्रदेश के जैसलमेर जिले में हुई है। यहां मात्र 77 एमएम बारिश हुई है।

यह सामान्य से 58 फीसदी कम बारिश हुई है। जालौर में करीब 50 फीसदी, बांसवाड़ा में 39, सिरोही में 36, बालोतरा में 28, डूंगरपुर में 24 एवं जोधपुर में 27 फीसदी कम बारिश हुई है।

बता दें कि राज्य में वर्ष 2025 में मानसून के दौरान लगभग 715.2 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। प्रदेश के पंचायत मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि पशुओं के लिए चारा डिपो खोलने के साथ ही पशु एवं राहत शिविर प्रारंभ किए जा रहे हैं। आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला कलक्टरों को एक-एक करोड़ रुपये का आपातकालीन कोष मंजूर किया है।

गुजरात में सौराष्ट्र-कच्छ के चार जिलों को अकालग्रस्त घोषित

गुजरात में सौराष्ट्र-कच्छ के चार जिलों को अकालग्रस्त घोषित किया गया है। प्रभावित जिलों में रामजी योजना के तहत 150 दिन का रोजगार दिया जाएगा।

सरकार ने राज्य के 76 बांधों से रबी फसलों की सिंचाई के लिए पानी देने की योजना बनाई है, जबकि जून-जुलाई से ही कम दरों पर पशुओं के लिए चारा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बताया कि राज्य में औसत वर्षा 89 प्रतिशत हुई है, लेकिन कम वर्षा वाले सौराष्ट्र क्षेत्र के देवभूमि द्वारिका, जामनगर, पोरबंदर तथा कच्छ को सूखाग्रस्त माना गया है। सरकार ने प्रभावित जिलों के किसानों को आर्थिक सहायता की घोषणा की है।

सरकार के प्रवक्ता एवं केबिनेट मंत्री जीतूभाई वाघाणी ने बताया कि कम वर्षा वाले जिलों में सरकार की ओर से जून-जुलाई माह से ही राहत दरों पर घास और चारा उपलब्ध कराया जा रहा है।

कांग्रेस नेता तुषार चौधरी ने इसे जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बताया और कहा कि पूरे सौराष्ट्र व उत्तर गुजरात को अकालग्रस्त घोषित करना चाहिए था।