आसमान में तैनात हुई भारत की रणनीतिक आंख, जियो इमेजिंग सेटेलाइट की पूरी कहानी
भारत ने जीएसएलवी एफ-17 रॉकेट से अपने पहले भू-इमेजिंग उपग्रह ईओएस-05 का सफल प्रक्षेपण किया, जो देश की रणनीतिक निगरानी ...और पढ़ें

HighLights
इसरो ने अंतरिक्ष की निर्धारित कक्षा में स्थापित किया देश का पहला इमेजिंग सेटेलाइट
सीमाओं पर पैनी नजर रखने के साथ चक्रवात, बाढ़, जंगल की आग की मिलेगी सटीक जानकारी
जीएसएलवी एफ-17 राकेट ने ईओएस-05 जियो-इमेजिंग सेटेलाइट को कक्षा में किया स्थापित
डिजिटल डेस्क, श्रीहरिकोटा। इस साल की जन्माष्टमी पर भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और पन्ना जोड़ दिया। शुक्रवार तड़के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पर 27 घंटे से एक नए उपग्रह के प्रक्षेपण की उलटी गिनती चल रही थी। सात, छह, पांच, चार..... घड़ी की सूइयों ने 2.55 का समय बजाया और जीएसएलवी एफ-17 राकेट ने लॉन्चिंग पैड पर उड़ान भरी।
18 मिनट बाद इसने ईओएस-05 जियो-इमेजिंग सेटेलाइट को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया। इसके साथ ही इसरो ने एक नया इतिहास लिख दिया। यह देश का पहला जियो इमेजिंग सेटेलाइट है। 'आसमान की आंख' बताया जा रहा यह उपग्रह रणनीतिक डाटा देगा, रियल टाइम तस्वीरें मुहैया कराएगा, देश की सीमाओं पर 24 घंटे पैनी नजर रखेगा और चक्रवात, बाढ़ तथा जंगल की आग की सटीक जानकारी देगा। खेती और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी यह देश की मदद करेगा।

असामान्य समय और बारिश भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए पहुंचे थे। शुक्रवार को हुआ यह सफल प्रक्षेपण वर्ष 2026 के लिए अंतरिक्ष एजेंसी की पहली कामयाबी है। 12 जनवरी को साल की शुरुआत में 16 उपग्रहों को ले जा रहे पीएसएलवी-सी62 राकेट में लॉन्चिंग के तीसरे चरण में "गड़बड़ी" आ गई थी, जिसके कारण राकेट उपग्रहों को निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं कर पाया था।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने कहा कि जियो-इमेजिंग सेटेलाइट का जीवनकाल नौ वर्ष है। उन्होंने उन अटकलों को खारिज कर दिया कि यह एक "जासूसी उपग्रह" है। कुछ दिन पहले नारायणन ने तिरुमला तिरुपति मंदिर का दौरा किया था और मिशन की सफलता के लिए भगवान वेंकटेश्वर स्वामी से प्रार्थना की थी।

ईओएस-05 जियो-इमेजिंग सेटेलाइट की विशेषताएं
- -2300 किलोग्राम से अधिक वजन का यह उपग्रह जीएसएलवी द्वारा ले जाए जाने वाला सबसे भारी सेटेलाइट है। यह श्रीहरिकोटा से 107वां प्रक्षेपण और जीएसएलवी का 19वां मिशन है।
- -जहां कई जियो इमेजिंग उपग्रह धरती की निचली कक्षा से संचालित होते हैं, वहीं ईओएस-05 करीब 36,000 किलोमीटर की ऊंचाई पर जियो-आर्बिट (भूस्थिर कक्षा) में स्थापित होगा। इस कक्षा में उपग्रह पृथ्वी की घूर्णन गति के साथ तालमेल बैठाएगा, जिससे यह एक ही स्थान पर स्थिर नजर आएगा।
- -ईओएस-05 को मल्टी-बैंड आपरेटिंग क्षमताओं वाला एक अनोखा और अपनी तरह का इकलौता सेटेलाइट बताया जा रहा है। कान्फिगरेशन, सामग्री और क्षमता के लिहाज से यह एक जटिल उपग्रह है।
- -यह उपग्रह दृश्य, इन्फ्रारेड, मल्टीस्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड में उन्नत तस्वीरें लेने में सक्षम है। भूस्थिर कक्षा में हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग क्षमता प्रदान करने वाला यह दुनिया का संभवतः पहला उपग्रह है।
- -हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग का अर्थ एक ऐसी उन्नत तकनीक से है, जो विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के प्रकाश को सैकड़ों वेवलेंथ बैंड में विभाजित करके जानकारी एकत्र करती है।
बिना चालक वाले गगनयान मिशन पर जोर-शोर से चल रहा काम
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने शुक्रवार को कहा कि इस कैलेंडर वर्ष में बिना चालक वाले पहले गगनयान मिशन का प्रक्षेपण करने के लिए जोरदार और व्यवस्थित तरीके से काम चल रहा है। पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का प्रक्षेपण इस वर्ष में इसरो की पहली सफलता है। कड़ी मेहनत का पुरस्कार यह है कि और अधिक काम किया जाए। इसी के तहत इसरो की टीम, उद्योग जगत और दूसरे संगठनों के साथ मिलकर पहले बिना चालक दल वाले गगनयान मिशन पर काम कर रही है।

'इसरो की एक और शानदार उपलब्धि और हमारे देश के लिए गर्व का पल। भारत के पहले इमेजिंग सेटेलाइट का सफल प्रक्षेपण अंतरिक्ष क्षेत्र में देश की उत्कृष्टता, नवाचार और बढ़ती क्षमताओं का प्रतीक है। इसरो और भारतीय उद्योग के बीच बढ़ती साझेदारी देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ताकत दे रही है और भारत की क्षमताओं का विस्तार कर रही है।'
-नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री
सोर्स- पीटीआई के इनपुट के साथ
