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देश में पहली बार IVF से बद्री बछिया का जन्म, NDRI के डेयरी फार्म में सक्सेसफुल डिलीवरी

Published: Sat, 12 Sep 2026 08:44 PM (IST)

देश में पहली बार इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक से बद्री नस्ल की स्वस्थ बछिया का जन्म हुआ है।

IVF से पहली बार बद्री बछिया का जन्म (प्रतीकात्मक फोटो)

IVF से पहली बार बद्री बछिया का जन्म (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. देश में पहली बार आईवीएफ से बद्री बछिया का जन्म।

  2. NDRI करनाल ने हासिल की यह महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि।

  3. बद्री नस्ल के संरक्षण और सुधार में बड़ा कदम।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में पहली बार इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आइवीएफ) तकनीक की मदद से बद्री नस्ल की एक स्वस्थ बछिया का जन्म हुआ है।

आइसीएआर-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआइ) के विज्ञानियों की इस सफलता को उत्तराखंड की इस स्थानीय नस्ल के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बद्री नस्ल की गायों की संख्या लगातार घट रही है और यह प्रजाति संरक्षण की जरूरत वाली नस्लों में शामिल है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, बछिया का जन्म शुक्रवार को एनडीआरआइ के अकादमिक डेयरी फार्म में हुआ।

इसके लिए बद्री नस्ल की गाय से लिए गए अंडाणु को प्रयोगशाला में बद्री सांड के वीर्य से फर्टिलाइज कर भ्रूण तैयार किया गया। इसके बाद इस भ्रूण को शाहीवाल नस्ल की गाय में प्रत्यारोपित किया गया, जिसने सरोगेट मां के तौर पर बछिया को जन्म दिया।

लैब में तैयार किया गया भ्रूण

इस परियोजना में करनाल स्थित आइसीएआर-नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट और पंतनगर स्थित जीबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलाजी ने उत्तराखंड बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल की मदद से काम किया।

परियोजना की शुरुआत 2023 में तत्कालीन कुलपति एमएस चौहान के कार्यकाल में हुई थी।आइसीएआर-एनडीआरआइ के निदेशक धीर सिंह ने कहा कि ओपीयू-आइवीएफ जैसी आधुनिक प्रजनन तकनीक से अच्छी नस्ल की मादा पशुओं की संख्या तेजी से बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इस सफलता से बद्री नस्ल के संरक्षण और नस्ल सुधार के बड़े कार्यक्रमों के लिए आधार तैयार होगा।

बद्री गाय पहाड़ी इलाकों की परिस्थितियों के अनुकूल छोटी और मजबूत नस्ल है। इसे उत्तराखंड का राज्य पशु भी घोषित किया गया है। देश में लगातार हो रही क्रास-ब्रीडिंग और कई स्थानीय पशु नस्लों के छोटे होते झुंड के कारण इनके संरक्षण की चुनौती बढ़ी है।

एक और बछड़े के जन्म की उम्मीदमंत्रालय के अनुसार, एक अन्य सरोगेट गाय के भी अगले पांच से सात दिनों में एक बद्री बछड़े को जन्म देने की उम्मीद है।

विज्ञानियों की टीम अधिक दूध देने वाली बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम कर रही है। परियोजना के अगले चरण में आइवीएफ और क्लोनिंग से तैयार भ्रूणों को कई सरोगेट गायों में प्रत्यारोपित करने की योजना है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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