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पीएम मोदी की 'समुद्र नीति': ऑस्ट्रेलिया-इंडोनेशिया के साथ भारत की अहम डील, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ी ताकत

By Jaiprakash RanjanEdited By: Sakshi Gupta
Published: Thu, 09 Jul 2026 04:20 PM (GMT+05:30)

भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक हितों के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले क्वाड से परे ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ रक्षा संबंध मजबूत कर रहा है।

ऑस्ट्रेलिया-इंडोनेशिया के साथ भारत की अहम डील (फोटो-रॉयटर्स)

ऑस्ट्रेलिया-इंडोनेशिया के साथ भारत की अहम डील (फोटो-रॉयटर्स)

HighLights

  1. भारत क्वाड से इतर हिंद-प्रशांत में रक्षा संबंध मजबूत कर रहा।

  2. ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया के साथ समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग पर समझौते।

  3. एक-दूसरे के क्षेत्र में विमान तैनाती बढ़ाने पर बनी सहमति।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। अमेरिका की अगुवाई में गठित क्वाड संगठन का एक सक्रिय देश होने के बावजूद हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक हितों के लिए भारत सिर्फ देश के भरोसे नहीं रहना चाहता। बल्कि अब इस ‌क्षेत्र के कुछ और महत्वपूर्ण देशों के साथ अपनी रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ कर रहा है।

इस बात का पता मेलबार्न में भारत और ऑस्ट्रेलिया सालाना सम्मेलन के बाद जारी तीन प्रमुख घोषणाओं से चलता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा व सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणापत्र जारी किये हैं जबकि समुद्री सुरक्षा पर अलग से एक रोडमैप की घोषणा की है और अलग से ऊर्जा सुरक्षा में सहयोग का भावी सहयोग पर संयुक्त घोषणापत्र लागू किया है।

ठीक इसी तरह के तीन समझौते दो दिन पहले पीएम मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच किया गया है।

भारत की अहम डील

जानकारों का मानना है कि यह भारत की इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया व हिंद प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों के बीच समुद्री सुरक्षा का व्यापक सहयोग ढांचा तैयार करने की तरफ बढ़ाया गया कदम है।

भारत ने पहले ही इन देशों के साथ वर्ष 2017 में एक त्रिपक्षीय सहयोग को लेकर वार्ता की शुरुआत की थी। इसकी अंतिम बैठक कैनबरा में 24 जून, 2025 ट्राइलेटरल मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलाग के तहत हुई है, जिसें उत्तर-पूर्व हिंद महासागर में सुरक्षा चुनौतियों और संयुक्त अभियानों पर पहली बार बात हुई है।

जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी की एक साथ इन दोनों देशों की यात्रा करने और दोनों देशों के साथ समुद्री सुरक्षा पर व्यापक रोडमैप की घोषणा भारत की दीर्घकालिक रणनीति के तहत उठाया गया कदम है। आने वाले दिनों में इन तीनों देशो की तरफ से और घोषणाएं संभव हैं।

पीएम नरेन्द्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथोनी अलबनिजी ने जारी घोषणापत्र में कहा है कि, 'हम इंडो-पैसिफिक के अन्य साझेदार देशों के साथ निरंतर सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता जताते हैं। इसमें त्रिपक्षीय सहयोग तंत्र शामिल हैं तथा इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव के माध्यम से साझेदारों के साथ और गहरा जुड़ाव है।'

घोषणापत्र में आगे कहा गया, 'हम संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान के साथ अपने सहयोग को बढ़ाएंगे ताकि क्षमता निर्माण और सहयोग के जरिए एक खुला, स्थिर, शांतिपूर्ण और समृद्ध इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाने के अपने सकारात्मक विजन को पूरा किया जा सके।'

भारत और ऑस्ट्रेलिया की तरफ से रक्षा व सुरक्षा सहयोग संयुक्त घोषणापत्र के कई बिंदू इनकी प्रतिबद्धता को बताते हैं। इसमें हिंद प्रशांत क्षेत्र में साझा हितों को प्रभावित करने वाले रक्षा संबंधी विकास करने, अन्य साझेदार देशों के साथ मिलकर रक्षा अभ्यासों को बढ़ाने, रक्षा बलों के बीच आपरेशन में तालबेल बढ़ाने व सूचना साझा करने के प्रयासों को तेज करना तो शामिल होगा ही साथ ही एक-दूसरे के क्षेत्र से विमान तैनाती का विस्तार देने, रक्षा कर्मियों के बीच आदान-प्रदान, शिक्षा, प्रशिक्षण तथा संपर्क भूमिकाओं के माध्यम से संबंधों को गहरा करना और कुशल रक्षा कार्यबल की भर्ती में सहयोग के अवसरों को तलाशने का काम भी होगा।

इसी तरह से आतंकवाद के खिलाफ भी सहयोग को बढ़ाने की बात है। हाल के वर्षों में भारत अगर पहलगाम हमले से पीड़ित हुआ है तो ऑस्ट्रेलिया में बोंडी बीच पर आतंकवादी हमला हुआ था।

इसके मद्देनजर दोनों देश अब आतंकवादियों के बीच नई प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल के खतरे, आतंकवादियों को वित्तीय सुविधा पहुंचाने, आनलाइन तरीके से कट्टरवाद को बढ़ावा देने वाले गतिविधियों के खिलाफ सहयोग को व्यापक करेंगे।

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