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'कोई आधिकारिक भागीदारी नहीं', भारत ने पाकिस्तान के साथ ट्रैक 2 वार्ता की खबरों से खुद को किया अलग

Published: Mon, 29 Jun 2026 04:55 PM (IST)Updated: Mon, 29 Jun 2026 08:02 PM (IST)

भारत सरकार ने श्रीलंका में भारत-पाक के बीच हुई 'ट्रैक-2' वार्ता में किसी भी आधिकारिक संलिप्तता से इनकार किया है।

HighLights

  1. सरकार ने 'ट्रैक-2' वार्ता में आधिकारिक संलिप्तता से इनकार किया।

  2. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इसे निजी संस्थाओं का आयोजन बताया।

  3. अनौपचारिक बातचीत में पूर्व अधिकारी और शिक्षाविद शामिल थे।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत और पाक के बीच 'ट्रैक-2' वार्ता को लेकर चल रही अटकलों के बीच विदेश सचिव विक्रम मिसरी का बड़ा बयान सामने आया है। इस बयान में भारत ने पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार के राजनायिक संबंधों में सुधार की खबरों का खंडन किया है। विदेश सचिव ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से भारत सरकार का कोई आधिकारिक संबंध नहीं है। ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोग सरकार के प्रतिनिधि नहीं होते।

मिसरी ने साफ किया कि दुनियाभर के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह के कार्यक्रम और बैठके आयोजित होती हैं। इस तरह की बैठकों में कुछ भी नया नहीं है यह पहले भी होती रहीं हैं। मिसरी ने साफ किया कि ये बैठक पूरी तरफ से प्राइवेट संस्थाओं द्वारा आयोजित की गई थी जिसका भारत सरकार से कोई लेना-देना नहीं है।

भारत ने साफ किया रूख

मिसरी ने साफ किया कि 'ट्रैक II' बातचीत कूटनीति का एक अनौपचारिक तरीका है जिसमें गैर-सरकारी लोग, जैसे कि शिक्षाविद, रिटायर हो चुके अधिकारी और सिविल सोसाइटी के नेता शामिल होते हैं। यह सरकारी स्तर की बातचीत के साथ-साथ चलती है, जिससे इसमें शामिल लोग बिना किसी राजनीतिक दबाव के पॉलिसी के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं और तनाव कम करने के तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं।

भारत्त ने वार्ता में लिया था हिस्सा?

भारत और पाकिस्तान के बीच यह बातचीत कोलंबो के एक होटल में लगभग दो दिनों तक अलग-अलग सत्रों में हुई। इस बैठक में भारत की ओर से पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे, इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव राम माधव और पूर्व राजनयिक रुचि घनश्याम ने हिस्सा लिया। पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्रालय के महानिदेशक सज्जाद हैदर खान, अमेरिका में पूर्व राजदूत शेरी रहमान और रिटायर हो चुके मेजर जनरल इसफंदियार अली खान पटौदी शामिल थे।

किन मुद्दों पर हुई बातचीत?

NDTV की खबर के अनुसार, बातचीत मुख्य रूप से सीमा पार आतंकवाद, पानी के बंटवारे, तनाव के समय बातचीत बेहतर बनाने और भविष्य में सैन्य टकराव का खतरा कम करने के तरीकों जैसे मुद्दों पर केंद्रित रही। हालांकि, इस बातचीत से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।