नई दिल्ली, जेएनएन। कोरोना वायरस के दो और नए वैरिएंट सामने आए हैं, लेकिन सुकून की बात यह है कि एमयू और सी.1.2 नामक इन दोनों वैरिएंट के मामले अभी तक भारत में नहीं पाए गए हैं। वैरिएंट का पता लगाने के लिए बनाए गए प्रयोगशालाओं के कंसोर्टियम इंसाकाग ने यह दावा करते हुए कहा कि देश में अभी भी डेल्टा और उससे समूह के अन्य वैरिएंट चिंता का कारण बने हुए हैं।

कंसोर्टियम ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के पाजिटिव नमूनों के सिक्वेंसिंग की मौजूदा सिफारिशों को कड़ाई से लागू करने पर जोर दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 30 अगस्त को बी.1.621 (बी.1.621.1 समेत) को वैरिएंट आफ इंटरेस्ट (वीओआइ) की सूची में डाला था और इसे 'एमयू' नाम दिया था। डब्ल्यूएचओ ने सी.1.2 को भी वीओआइ की सूची में शामिल किया है।

इंसाकाग ने कहा कि सी.1.2 सार्स-सीओवी-2 के सी.1 वैरिएंट से निकला है, जो सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था, लेकिन इसका प्रसार पूरी दुनिया में नहीं हुआ है। कंसोर्टियम ने 10 सितंबर की अपनी बुलेटिन में कहा है कि अभी तक भारत में एमयू और सी.1.2 वैरिएंट के केस नहीं सामने आए हैं। डेल्टा वैरिएंट का प्रसार ही चिंता का कारण है। यह वैरिएंट भारत समेत दुनिया के कई देशों में फैला है और भारत में महामारी की दूसरी लहर का कारण ही डेल्टा वैरिएंट को माना जाता है।

इस बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से बुधवार को सुबह आठ बजे अपडेट किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 24 घंटे के दौरान देश में 27,176 नए मामले मिले हैं। यह चौथा दिन है जब संक्रमण के नए केस 30 हजार से कम पाए गए हैं। इस दौरान 284 लोगों की जान भी गई है। सक्रिय मामलों में 11 हजार से ज्यादा की कमी आई है और एक्टिव केस 3,51,087 रह गए हैं जो कुल मामलों का 1.05 फीसद है। मरीजों के उबरने की दर में भी सुधार हुआ है और मृत्युदर पहले के स्तर पर बनी हुई है।

 

Edited By: Tanisk