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तुर्किए की सैन्य उड़ानों से बढ़ी भारत की चिंता, मक्का समझौते के बाद पाकिस्तान को हथियार सप्लाई की आशंका

Published: Tue, 25 Aug 2026 05:45 AM (IST)Updated: Tue, 25 Aug 2026 07:08 AM (IST)

तुर्किए की सैन्य परिवहन उड़ानों में असामान्य वृद्धि ने भारतीय रक्षा हलकों में चिंता बढ़ा दी है, आशंका है कि पाकिस्तान को सैन्य हार्डवेयर भेजा जा रहा है।

तुर्किए की सैन्य उड़ानों से बढ़ी भारत की चिंता।

तुर्किए की सैन्य उड़ानों से बढ़ी भारत की चिंता।

HighLights

  1. तुर्किए की सैन्य उड़ानों से पाकिस्तान को हथियार आपूर्ति की आशंका।

  2. मक्का समझौते के बाद बढ़ी दोनों देशों की सैन्य गतिविधियां।

  3. भारत को पाकिस्तान द्वारा संभावित संघर्ष की तैयारी की चिंता।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों में पाकिस्तान के लिए तुर्किए की मिलिट्री ट्रांसपोर्ट उड़ानों में असामान्य बढ़ोतरी ने भारतीय रक्षा हलकों में चिंता पैदा कर दी है।

ओपन-सोर्स फ्लाइट ट्रैकर्स ने देखा कि 19 और 21 अगस्त के बीच तुर्किए के मिलिट्री ट्रांसपोर्ट विमान, जिनमें C-130 हरक्यूलिस और A400M शामिल हैं, पाकिस्तान के नूर खान, मसरूर और मुरीद जैसे एयर बेस पर उतरे।

पाकिस्तान को मिलिट्री हार्डवेयर भेज रहा तुर्किए?

यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि इन उड़ानों के जरिए पाकिस्तान को तुर्किए का मिलिट्री हार्डवेयर भेजा गया होगा, जिसमें अनमैन्ड एरियल सिस्टम और एयर-डिफेंस उपकरण जैसे बायकर और असिसगार्ड सिस्टम शामिल हैं।

मक्का समझौते के बाद बढ़ी दोंनों देशों में गतिविधि

ये विमान गतिविधियां 7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब के बीच त्रिपक्षीय मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर के ठीक बाद देखी गईं। यह समझौता एक सामूहिक रक्षा संधि बनाता है, जिसमें कहा गया है कि तीनों सदस्य देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा।

हालांकि, न तो पाकिस्तान और न ही तुर्किए ने आधिकारिक तौर पर इन ट्रांसपोर्ट ऑपरेशन्स की सटीक प्रकृति या उनमें ले जाए गए सामान की पुष्टि की है। तुर्किए के विमानों के पाकिस्तान में उतरने से रक्षा हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान भारत के साथ किसी और संघर्ष की तैयारी कर रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर के समय तुर्किए ने पाकिस्तान को किया था सपोर्ट

पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर से पहले, चीन और तुर्किए ने कथित तौर पर पाकिस्तान को एडवांस्ड मिलिट्री हार्डवेयर सप्लाई किया था, जिसमें चीनी PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइलें और HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम, और तुर्किए मूल के बायरक्तार और असिसगार्ड सोंगर कामिकेज ड्रोन शामिल थे। उन्होंने रियल-टाइम बैटलफील्ड डेटा और टैक्टिकल सपोर्ट भी दिया।

पिछले साल चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान, भारतीय सशस्त्र बलों ने अपने मल्टी-लेयर्ड एयर डिफेंस ग्रिड और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करके इन हमलों का सामना किया और महत्वपूर्ण सैन्य या नागरिक बुनियादी ढांचे तक पहुंचने से पहले ही सभी हवाई खतरों को सफलतापूर्वक रोक दिया।

भारतीय बलों ने पाकिस्तान के रक्षा नेटवर्क को ध्वस्त करने और उसके आक्रामक हमलों को नाकाम करने के लिए स्वदेशी तकनीक और एडवांस्ड एंटी-एक्सेस फ्रेमवर्क का इस्तेमाल किया।