नई दिल्ली, एएनआइ। ऐप बैन के बाद मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति (NEP)में 'चाइनीज' को विदेशी भाषा की लिस्ट से बाहर करके चीन को बड़ा झटका दिया है। इससे तिलमिलाए चीन ने भारत से राजनीतिकरण न करने को कहा है। इसे लेकर भारत स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि उम्मीद है भारत कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट और चीन भारत उच्च शिक्षा सहयोग के उद्देश्य पर निष्पक्ष व्यवहार करेगा, राजनीतिकरण से बचेगा और चीन-भारत के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान का स्थिर विकास जारी रहेगा।  

इसे लेकर चीनी दूतावास ने आगे कहा कि पिछले कुछ सालों में कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट ने भारत में चीनी भाषा शिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसे भारतीय शिक्षा समुदाय से मान्यता प्राप्त है। दोनों देशों के बीच तेजी से बढ़ रहे आर्थिक, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ, भारत में चीनी भाषा शिक्षण की मांग बढ़ रही है। कन्फ्यूशियस इंस्टीट्यूट परियोजना पर चीन-भारत सहयोग 10 सालों से अधिक समय से चला आ रहा है।

चीन से आयातित डिजिटल प्रिंटिंग प्लेट पर एंटी-डंपिंग शुल्क

भारत ने पांच देशों से आयातित डिजिटल प्रिंटिंग प्लेट पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगा दिया है। इनमें चीन, जापान, कोरिया, ताइवान और वियतनाम से आयातित प्लेट शामिल हैं। घरेलू कंपनियों को इन देशों से होने वाले सस्ते आयात से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है। वाणिज्य मंत्रालय की जांच इकाई डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रिमेडीज (डीजीटीआर) ने मामले की जांच के बाद शुल्क लगाने की सिफारिश की। जांच में पाया गया कि इन देशों से डिजिटल प्रिंटिंग प्लेट के आयात में बड़ी वृद्धि हुई है।

ऐप बैन से बौखलाया चीन

बता दें कि भारत द्वारा 59 चीनी मोबाइल एप और इनके क्लोन 47 ऐप पर प्रतिबंध लगाए जाने से बौखलाए चीन ने इसे कंपनियों के कानूनी अधिकार का उल्लंघन बताया था। चीन के दूतावास ने कहा था कि चीनी कंपनियों के कानूनी अधिकार व चीनी निवेशकों समेत तमाम अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के हितों का बाजार के नियमों के मुताबिक, संरक्षण करना भारत का कर्तव्य है। भारत के इस कदम के बाद अमेरिका समेत जिन देशों में चीनी मोबाइल ऐप को लेकर अंदर ही अंदर सुगबुगाहट थी वहां भी आवाज बुलंद होने लगी है। यही कारण है कि चीन बेचैन हो गया है। 

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