संजय मिश्र, नई दिल्ली। गलवन घाटी में सोमवार रात चीनी सैनिकों की धोखेबाजी का मुंहतोड़ जवाब देने के बाद अब भारतीय सेना इस मोर्चे पर कोई कसर छोड़ने को तैयार नहीं है। सेना ने चीन से लगी सभी सीमाओं के अग्रिम मोर्चो पर तैनाती बढ़ा दी है। कई सीमावर्ती गांवों को भी खाली कराया जा रहा है। इस बीच, मौजूदा हालात सामान्य करने के लिए सैन्य कमांडर स्तर पर हुई बातचीत में गुरुवार को सेना ने फिर स्पष्ट कर दिया है कि गलवन घाटी में पहले की स्थिति बहाल करने के अलावा इसका चीन के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

वहीं गलवन घाटी पर दावा ठोकने की चालबाजी में लगी चीनी सेना के रुख के कारण लगातार तीसरे दिन भी बातचीत का कोई हल नहीं निकला। हालांकि बैठक के नतीजों को लेकर दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया। भारत-चीन के सैन्य कमांडर स्तर की बैठक गुरुवार को भी गलवन घाटी के प्वाइंट-14 के करीब ही हुई जहां सोमवार की रात भीषण हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। सामरिक सूत्रों ने फिर बताया कि चीन भले इस घटना में अपने हताहतों की संख्या पर मुंह नहीं खोल रहा, मगर उसके करीब 45 सैनिक हताहत हुए हैं। इस बीच भारतीय सेना ने अमेरिकी अखबार की रिपोर्ट का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि भारत का कोई सैनिक सोमवार की झड़प के बाद से लापता नहीं है।

गलवन इलाके में चीनी सेना पीछे हटने को तैयार नहीं  

गलवन घाटी की घटना के बाद भारतीय फौज ने यहां पर अपने सैनिकों का जमावड़ा बढ़ा दिया है। इतना ही नहीं इस जगह से करीब दो-तीन किलोमीटर दूर सेना के दर्जनों ट्रक अपने जरूरी संसाधनों के साथ खड़े हैं। वहीं चीन ने भी गलवन घाटी से एक किलोमीटर दूर एलएसी के पार अपने इलाके में सैन्य वाहनों और सैनिकों का जमावड़ा कर रखा है। वहीं चीनी सेना अब भी गलवन घाटी में संघर्ष के इलाके से पीछे हटने को तैयार नहीं है। वहीं चीन ने भी गलवन घाटी से एक किलोमीटर दूर एलएसी के पार अपने इलाके में सैन्य वाहनों और सैनिकों का जमावड़ा कर रखा है। 

तनाव दूर करने की कोशिशें भी तेज

दोनों देशों की तरफ से तनाव दूर करने की कोशिशें भी तेज होने लगी हैं। गलवन सेक्टर में स्थानीय सैन्य कमांडरों के बीच होने वाली बातचीत के अलावा दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास और नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने व समन्वय और सहयोग बनाने के लिए गठित वìकग मैकेनिज्म (डब्ल्यूएमसीसी) भी सक्रिय है।

दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की भी 23 जून को बात होनी है। यह बात रूस, भारत व चीन (आरआइसी) के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान होगी। वैसे इस वर्चुअल बैठक में द्विपक्षीय मुद्दे को नहीं उठाया जाता है, लेकिन माना जा रहा है कि रूस की तरफ से अपने दोनों मित्र राष्ट्रों के बीच तनाव कम करने की कोशिश की जाएगी। सोमवार को गलवन में जिस तरह से चीनी सेना ने भारतीय सेना पर हिंसक हमला किया था उसके बाद भारत ने इस बैठक का बहिष्कार करने पर विचार किया था।

चीनी सैनिकों के एलएसी के उस पार जाने की शर्त पर अडिग है भारतीय सेना 

सोमवार रात की घटना के बाद चीन के ऐसे किसी मंसूबे को नाकाम करने के लिए ही भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को अपने अस्थायी टेंट उखाड़ कर बाहर गलवन घाटी से एलएसी के उस पार जाने की पहली शर्त पर अडिग है। सामरिक सूत्रों के अनुसार चीनी सेना तनाव घटाने के उपायों की बजाय अब भी अपनी चालबाजी के कई रंग दिखा रही है और इस क्रम में बुल्डोजरों के सहारे गलवन नदी के बहाव को बाधित करने की भी कोशिश कर रहा है।

पूर्वी लद्दाख में एलएसी के अग्रिम मोर्चे पर गहराए तनाव और चीनी सैनिकों की धूर्तता के मद्देनजर ही भारतीय सेना ने डेमचोक और पैंगोंग इलाके के सीमावर्ती गावों को खाली कराने का निर्देश दिया है और मोर्चे पर तैनात होने वाले सैनिकों की संख्या में बढ़ा इजाफा किया है। इन सीमावर्ती गांवों के मोबाइल फोन नेटवर्क को भी फिलहाल बंद कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक गलवान घाटी के अलावा सेना ने दौलत बेग ओल्डी, चुशूल और डेपसांग इलाके में भी अपने सैनिकों की तैनाती की संख्या बढ़ा दी है।

 

Edited By: Arun Kumar Singh