नई दिल्ली, प्रेट्र। पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के कांसुलर एक्सेस पर पाकिस्तान की शर्त को भारत ने ठुकरा दिया है। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने सशर्त कांसुलर एक्सेस पर सहमति जताई थी, जिसपर भारत ने अपनी आपत्ति जताई है। भारत सरकार ने पाकिस्तान की कांसुलर एक्सेस पर किसी भी शर्त को मानने से इनकार दिया है। भारत, पाकिस्तान से कुलभूषण जाधव को भय मुक्त करने के लिए एक वातावरण में 'बेखटके' कांसुलर एक्सेस चाहता है।

इससे पहले गुरुवार को पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान काउंसलर एक्सेस देने के लिए तैयार हो गया था। पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से बताया गया कि  कुलभूषण जाधव को शुक्रवार को काउंसलर एक्सेस दिया जाएगा जिसके तहत जाधव भारतीय राजनयिक से मिल सकता है। ICJ के फैसले के बाद पाकिस्तान जाधव को काउंसलर एक्सेस देने के लिए तैयार हुआ है। अभी तक पाकिस्तान ऐसा करने से मना करता रहा है।

पाकिस्तान के इस फैसले पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस देने की पेशकश की है। हमें पाकिस्तान का यह प्रस्ताव मिला है। हम आईसीजे के फैसले और उसकी गाइडलाइन के आधार में प्रस्ताव का मूल्यांकन कर रहे हैं। इस पर जो भी जवाब देना है हम हम राजनयिक के माध्यम पाकिस्तान को दें देंगे।

क्या होता है कांसुलर एक्सेस ?
VCCR (Vienna Convention on Consular Relations) के आर्टिकल 36 (1) (बी) के तहत अगर किसी देश (A) के नागरिक को किसी दूसरे देश (B) में गिरफ्तार किया जाता है, तो देश B को बिना देरी किए वीसीसीआर के अधिकारों के तहत उस देश A को जानकारी देनी होगी। जिसमें देश A के अधिकारियों को जानकारी देना और उनसे मदद लेना शामिल है। साथ ही देश B को देश A के दूतावास या उच्चायोग को ये जानकारी देना जरूरी है कि उन्होंने उसके देश के नागरिक को गिरफ्तार किया है।

बता दें कि पूर्व भारतीय नौसैनिक और कारोबारी 49 वर्षीय कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है जिसकी अंतरराष्ट्रीय अदालत (आइसीजे) ने समीक्षा करने को कहा है। साथ ही जाधव को विएना कंवेंशन के तहत काउंसलर एक्सेस भी देने का निर्देश दिया गया था।

2017 में भारत ने ICJ में उठाया था मामला
8 मई 2017 को पहली बार भारत ने इस मामले में अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उस वक्‍त भारत की प्राथमिकता जाधव को मिली फांसी की सजा का स्‍थगन थी। भारत इसमें कामयाब भी रहा और 18 मई 2017 को अंतरराष्‍ट्रीय कोर्ट ने कुलभूषण जाधव (Kulbhushan Jadhav) की सजा के स्‍थगन का आदेश दिया था। इस आदेश में यहां तक कहा गया था कि जब तक आईसीजे इस संबंध में अपना फैसला न सुना दे तब तक पाकिस्‍तान सैन्‍य अदालत द्वारा दी गई सजा को स्‍थगित किया जाए।

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