जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। क्या भारत और चीन डोकलाम विवाद को पीछे छोड़ चुके हैं? इसका सीधा-सा जवाब देना फिलहाल तो मुश्किल है। लेकिन पिछले एक महीने से दोनों देशों के बीच जिस तेजी से हर द्विपक्षीय मुद्दे पर वार्ताएं हो रही है वह रिश्तों की पेंच सुलझाने के नए इरादे को बताता है। विदेश सचिव विजय गोखले की चीन यात्रा से जो सिलसिला शुरू हुआ था उसके बाद यानी पिछले एक महीने में भारत और चीन के बीच सात उच्चस्तरीय वार्ताएं हो चुकी है। इसके अलावा पीएम नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के चीन दौरे की तैयारियां चल रही है। स्वराज व सीतारमण मई में चीन जाएंगी।

सिर्फ पिछले चार दिनों के दौरान ही भारत और चीन के बीच बातचीत का लेखा-जोखा देखें तो साफ हो जाता है कि तकरीबन उन हर मुद्दों पर दोनों देश बातचीत कर रहे हैं जो रिश्तों में तनाव का कारण बनते हैं। शनिवार को बीजिंग में दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को प्रगाढ़ करने को लेकर बातचीत हुई। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार की अगुवाई में हुई इस बातचीत में भारत ने चीन को सोयाबीन निर्यात करने का आफर दिया।

सनद रहे कि चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वार की वजह से वहां आयात होने वाले अमेरिकी सोयाबीन को लेकर संकट पैदा हो गया है। ऐसे में भारत ने चीन को अमेरिकी प्रतिबंध से उबरने के लिए सोयाबीन निर्यात करने का प्रस्ताव किया है। इसके दो दिन पहले भारत और चीन के पेट्रोलियम मंत्रियों के बीच एक खास बैठक हुई, जिसमें कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ साझा रणनीति बनाने की सहमति बनी। भारत व चीन दुनिया के सबसे बड़े तेल खरीददार देश हैं और पहली बार ये दोनों मिल कर तेल उत्पादक देशों पर दबाव बनाने की रणनीति बनाने को तैयार हुए हैं।

भारतीय एनएसए अजीत डोभाल 12 व 13 अप्रैल को बीजिंग में थे, जहां उनकी अपने समकक्ष यांग यिची के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए आने वाले दिनों में उठाए जाने कदमों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा हितों के लिए साथ साथ काम करने को लेकर बातचीत हुई। एक हफ्ते के दौरान यह डोभाल की चीन के उच्चस्तरीय नेताओं के साथ दूसरी बातचीत थी। 06 अप्रैल, 2018 को चीन के उप-विदेश मंत्री कोंग शुआनयू नई दिल्ली में थे और यहां उनकी डोभाल के साथ ही विदेश सचिव विजय गोखले से भी अलग-अलग वार्ताएं हुई थीं। इसके ठीक चार दिन बाद यानी 10 अप्रैल, 2018 को दोनो देशों के बीच हथियारों में कटौती और इनके अप्रसार के मुद्दे पर बैठक हुई। इसके पहले 22 मार्च, 2018 को सीमा विवाद सुलझाने के लिए गठित विशेष समिति की बैठक हुई थी।

विदेश मंत्रालय के अधिकारी मानते हैं कि पहली बार दोनों देशों के बीच इस तरह से लगातार बातचीत का दौर चल रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि डोकलाम विवाद से आपसी रिश्तों में उपजे तनाव को अब काटने की गंभीर कोशिश हो रही है। डोकलाम विवाद और उसके पहले एनएसजी में भारत के प्रवेश पर चीन के विरोध की वजह से दोनों देशों में काफी दूरियां बढ़ गई थी। इस वजह से आर्थिक व रणनीतिक हितों पर चल रहे विचार विमर्श का दौर प्रभावित हो गया था। भारतीय पीएम, विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के अगले कुछ हफ्तों में चीन जाने से यह दौर और तेजी से आगे बढ़ेगा। शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेने पीएम मोदी जून, 2018 में बीजिंग जाएंगे जहां उनकी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता तय है।

Posted By: Tilak Raj