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चुनाव में PM मोदी के भाषणों के खिलाफ नाराजगी जताने के लिए विपक्षी I.N.D.I.A के नेताओं ने शपथ का किया बहिष्कार

विपक्षी आईएनडीआईए गठबंधन ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सत्तारूढ़ हुई एनडीए सरकार के शपथ समारोह का बहिष्कार कर साफ संदेश दे दिया है कि लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी हुई सियासी जंग पर फिलहाल विराम लगने की संभावनाएं नहीं हैं। विपक्ष ने चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषणों को झूठ और घृणा पर आधारित बताया।

By Jagran News Edited By: Abhinav Atrey Published: Mon, 10 Jun 2024 06:00 AM (IST)Updated: Mon, 10 Jun 2024 06:10 AM (IST)
मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा के प्रतिकूल आचरण किया- विपक्ष (फाइल फोटो)

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विपक्षी आईएनडीआईए गठबंधन ने नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार सत्तारूढ़ हुई एनडीए सरकार के शपथ समारोह का बहिष्कार कर साफ संदेश दे दिया है कि लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी हुई सियासी जंग पर फिलहाल विराम लगने की संभावनाएं नहीं हैं।

विपक्ष ने चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषणों को झूठ और घृणा पर आधारित बताते हुए इस पर अपने विरोध का इजहार करने के लिए शपथ समारोह से दूरी बनाने का एकमत से फैसला किया।

मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा के प्रतिकूल आचरण किया

राजग सरकार के शपथ समारोह में शामिल नहीं होने के विपक्षी आईएनडीआईए गठबंधन के दलों के निर्णय को जायज ठहराते हुए कांग्रेस के उच्चपदस्थ सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनाव अभियान के दौरान झूठ, घृणा और सामाजिक विभेद पैदा करने वाले भाषणों का सिलसिला जारी रखा। इस दौरान विपक्षी दलों और उनके नेताओं के बारे में अर्नगल और अपमानजक टिप्पणियां कर प्रधानमंत्री पद की गरिमा के प्रतिकूल आचरण किया।

मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा का ख्याल नहीं- विपक्ष

उनका कहना था कि इसीलिए विपक्ष के सभी दलों में आम सहमति की भावना थी कि जब मोदी ने प्रधानमंत्री पद की गरिमा का ख्याल नहीं रखा है तो उनके शपथ समारोह में न जाकर उनके इस व्यवहार के प्रति अपनी भावनाएं जाहिर कर सकते हैं।

संवैधानिक प्रोटोकॉल के चलते शपथ में शामिल हुए खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के समारोह में शामिल होने की अनिवार्यता को देखते हुए विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों को इस पर कोई आपत्ति नहीं थी। खरगे राज्यसभा में नेता विपक्ष हैं और उनका एक संवैधानिक प्रोटोकॉल है जिसके चलते शपथ में जाना उनकी मजबूरी थी।

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