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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 15, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Independence Day 2022: 15 अगस्त के दिन देश के प्रधानमंत्री लाल किले से ही क्यों राष्ट्र को संबोधित करते हैं?

By Sanjay PokhriyalEdited By:
Published: Mon, 15 Aug 2022 11:38 AM (IST)

Independence Day 2022 वैसे तो हर वर्ष आज के दिन देश के प्रधानमंत्री ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से भाषण ...और पढ़ें

Independence Day 2022: वर्ष 2014 में 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। फाइल
Independence Day 2022: वर्ष 2014 में 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। फाइल

राज्यवर्धन सिंह राठौर। Independence Day 2022 लाल किला से प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री अपनी जनता के नाम संबोधन देते हैं। इस बार स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न अमृत महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। हो सकता है कि आपके मन- मस्तिष्क में यह सवाल उठता हो कि 15 अगस्त के दिन देश के प्रधानमंत्री लाल किले से ही क्यों राष्ट्र को संबोधित करते हैं, कहीं और से क्यों नहीं? दरअसल लाल किले से देश की कुछ भावनाएं ही ऐसी जुड़ी हैं।

उल्लेखनीय है कि देश की स्वतंत्रता की घोषणा के समय देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसी जगह पर तिरंगा झंडा फहराया था। यह सिलसिला आगे लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी से होते हुए वर्तमान प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी भी निभाते आ रहे हैं। ऐसा कोई दस्तावेज या कोई लिखित संविधान नहीं कि लाल किले से ही झंडा फहराया जाए। परंतु यह एक परंपरा है, जिसे देश बड़े ही गौरव के साथ इस बार स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पूरे उत्साह के साथ मना रहा है।

वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लाल किले से दिए गए पहले भाषण की बात करते हैं। चूंकि वर्ष 2014 में जिस बहुमत के साथ नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी थी, वह एक इतिहास था। वर्ष 2014 में लाल किले से दिए गए अपने पहले भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं को ‘प्रधान सेवक’ कहकर संबोधित किया था। यह एक सामान्य शब्द नहीं है। इसकी चर्चा पूरी दुनिया में हुई। आखिर ऐसा क्या कारण रहा होगा कि देश का प्रधानमंत्री स्वयं को प्रधान सेवक बता रहा है? इसका कारण है, सहजता। एक गरीब परिवार से आने वाले व्यक्ति का देश का प्रधानमंत्री बनना। जीवन के संघर्षों का सफर तय करके देशवासियों के दिल में बस जाने वाला, हमेशा जनता के साथ ही दिखता है, इसलिए जनता की बात करता है।

बतौर प्रधानमंत्री अपने पहले ही स्वतंत्रता दिवस के भाषण में नरेन्द्र मोदी ने यह बता दिया कि वह राज करने नहीं, बल्कि जनता की सेवा करने आए हैं। देश के एक बड़े वर्ग ने इस भाषण और इस शब्द की तुलना पिछले प्रधानमंत्रियों के भाषण से भी की। स्वाभाविक सी बात है कि प्रधानमंत्री की कही गई बातों की तुलना पिछले प्रधानमंत्रियों से होगी ही। ध्यान देने वाला तथ्य यह है कि कई बार लाल किले से कुछ ऐसी बातें भी पहले कही गईं, जो विचारणीय रहीं, देश के लिए गंभीर रहीं। इस क्रम में वर्ष 1959 में लाल किले से दिया गया वह भाषण भी याद

किया जाना चाहिए, जिसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जनता को ‘लेजी’ कहा था। जी हां, अगर आप यह बात पहली बार पढ़ रहे हैं या सुन रहे हैं तो आपको शायद हैरानी हो रही होगी। यह हैरत पूरी दुनिया को हुई थी कि क्या कोई प्रधानमंत्री देश के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश की जनता को मेहनत नहीं करने वाला यानी आलसी बताए। परंतु सच तो सच है। ऐसा हुआ है।

हाल ही में एक वेबसाइट पर एक आलेख पढ़ने को मिला था। उसमें भी एक बार फिर नेहरू के ‘लेजी इंडियंस’ वाले बयान पर चर्चा की गई थी। यह अकेला उदाहरण नहीं है। वर्ष 1957 में भी नेहरू के लाल किले से राष्ट्र को संबोधन की आलोचना होती आई है। कुछ वर्षों पहले ही पाकिस्तान गुलाम जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण कर चुका था। तब देश के सैनिकों का हौसला बढ़ाने की बजाय नेहरू ने पाकिस्तान के साथ प्रेम का राग अलापने की बात कही थी। यह सबकुछ रिकार्ड में उपलब्ध है और आकाशवाणी के आर्काइव में सुरक्षित है। लाल किले से देश को स्तब्ध कर देने वाले भाषणों के क्रम में इंदिरा गांधी का नाम भी लिया जाता है। वर्ष 1968 में इंदिरा गांधी ने देश के उद्योगपतियों को ‘क्रूक्स’ कहा था। वर्ष 1975 में उन्होंने लाल किले से दिए गए अपने भाषण में आपातकाल की तुलना देश की आजादी से की थी।

बहरहाल जो बीत गया सो बीत गया, बस चर्चा होते रहनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां बीते हुए कल, आज और आने वाले कल को जान सकें। वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के किसी भी भाषण को आप सुनिए। ऐसा लगता है जैसे देश का एक आम आदमी, जनता का ही प्रतिनिधि, जनता की बात कह रहा है। हर साल अपने रिपोर्ट कार्ड को सामने रखता है, आत्मनिर्भरता के मंत्र देता है, देश के जवान, किसान और विज्ञानियों का उत्साह बढ़ाता है। यही कारण है कि अब हर 15 अगस्त पर एक अलग किस्म की उत्सुकता रहती है कि इस बार क्या कहेंगे हमारे प्रधान सेवक? इस बार यानी आज भी है।

[लोकसभा सदस्य, भाजपा]