नई दिल्ली, पीटीआइ। देशभर में लॉकडाउन का असर वातावरण पर दिखने लगा है। 90 से अधिक शहरों में पिछले कुछ दिनों में न्यूनतम वायु प्रदूषण दर्ज किया गया है। पर्यावरणविदों ने इसे वेक-अप कॉल के रूप में व्यवहार करने और पर्यावरण की कीमत पर विकास के जुनून को रोकने का आग्रह किया है। कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए देश में लॉकडाउन लागू कर दिया गया है।

इसके तहत सरकार ने लोगों से घरों में रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने का आग्रह किया है। इससे देशभर में लोगों की आवाजाही में काफी कमी आई है। सरकार द्वारा संचालित सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के अनुसार, कोरोना वायरस प्रकोप के कारण किए गए उपायों से दिल्ली में पीएम 2.5 में 30 फीसद की गिरावट आई है। अहमदाबाद और पुणे में इसमें 15 फीसद की कमी आई है।

नाइट्रोजन ऑक्साइड (एनओएक्स) प्रदूषण का स्तर, जो श्वसन स्थितियों के जोखिम को बढ़ा सकता है, भी कम हो गया है। एनओएक्स प्रदूषण मुख्य रूप से ज्यादा वाहनों के चलने से होता है। एनओएक्स प्रदूषण में पुणे में 43 फीसद, मुंबई में 38 फीसद और अहमदाबाद में 50 फीसद की कमी आई है।

सफर के एक वैज्ञानिक गुफरान बेग ने कहा कि आम तौर पर मार्च में प्रदूषण मध्यम श्रेणी (एयर क्वालिटी इंडेक्स रेंज : 100-200) में होता है, जबकि वर्तमान में यह संतोषजनक (एक्यूआइ 50-100) या अच्छी (एक्यूआइ 0-50) श्रेणी का है। उन्होंने कहा कि यह लॉकडाउन का प्रभाव है। उद्योग, निर्माण और यातायात को बंद करने जैसे स्थानीय कारकों ने वायु की गुणवत्ता को सुधारने में योगदान दिया है।

 

Posted By: Krishna Bihari Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस