नई दिल्ली। सरकार इंटरनेट पर डाली जाने वाली सामग्रियों पर सुरक्षा कारणों से निगरानी बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कंप्यूटर विशेषज्ञ अंकित फाड़िया का मानना है कि किसी सामग्री को इंटरनेट पर डाले जाने से पहले देख पाना असंभव है। उन्होंने इंटरनेट पर आपत्तिाजनक सामग्री के प्रवाह को रोकने के लिए नियामक प्राधिकरण बनाने की सलाह दी है।

28 वर्षीय फाड़िया ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस मुद्दे पर चीन का अनुसरण नहीं करेगी। चीन में 40 हजार लोग सिर्फ वेबसाइट पर सामग्री को ब्लॉक करने के लिए ही काम करते हैं। इस विषय पर फाड़िया की किताब 'हाउ टू अनब्लॉक एवरीथिंग ऑन द इंटरनेट' भी काफी चर्चा में रह चुकी है। अंकित मात्र 13 साल के थे जब उन्होंने पहली बार चिप मैगजीन के इंटरनेट एडिशन को हैक किया था।

फाड़िया ने कहा, 'इंटरनेट पर सामग्री को नियंत्रित करने को लेकर दो मुद्दे हैं। पहला, यदि सरकार किसी वेबसाइट को पूरी तरह से बंद अथवा प्रतिबंधित करना चाहती है तो यह लोकतात्रिक नहीं है, क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना प्राप्त करने के अधिकार के खिलाफ है। दूसरा सरकार फेसबुक, ट्विटर और गूगल पर किसी सामग्री को डाले जाने से पूर्व देखने की बात कर रही है। तकनीकी तौर पर यह असंभव है, क्योंकि भारी मात्रा में सूचनाएं डाली जाती हैं। इस तरह का कोई सॉफ्टवेयर उपलब्ध नहीं है जिसके जरिए यह पता लगाया जा सके कि कौन सा वीडियो अथवा फोटो आपत्तिजनक, वैध अथवा अवैध है। इसलिए मुझे नहीं लगता है कि किसी सामग्री को प्रकाशन से पहले देख पाना संभव है। आपत्तिजनक सामग्री पकड़े जाने पर सरकार और सोशल नेटवर्क उसे हटाने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं।' फाड़िया कंप्यूटर की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर 14 किताबें लिख चुके हैं। उनकी किताबों को जापानी, कोरियाई जैसी तमाम विदेशी भाषाओं में भी अनुवादित किया जा चुका है।

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