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मद्रास हाई कोर्ट का अहम फैसला, प्रकृति को दिया 'जीवित व्यक्ति' का दर्जा

मद्रास हाई कोर्ट ने प्रकृति को जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया है। इसके लिए अदालत ने राष्ट्र के माता-पिता अधिकार क्षेत्र का उपयोग किया है जिससे कि एक जीवित व्यक्ति की तरह ही प्रकृति के सभी संबंधित अधिकारों कर्तव्यों और देनदारियों को संरक्षित किया जा सके।

By Arun Kumar SinghEdited By: Published: Sat, 30 Apr 2022 08:22 PM (IST)Updated: Sat, 30 Apr 2022 08:22 PM (IST)
मद्रास हाई कोर्ट ने प्रकृति को 'जीवित व्यक्ति' का दर्जा दिया है।

मदुरै, प्रेट्र। मद्रास हाई कोर्ट ने पेड़-पौधों समेत प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रकृति को 'जीवित व्यक्ति' का दर्जा दिया है। इसके लिए अदालत ने 'राष्ट्र के माता-पिता' अधिकार क्षेत्र का उपयोग किया है, जिससे कि एक जीवित व्यक्ति की तरह ही प्रकृति के सभी संबंधित अधिकारों, कर्तव्यों और देनदारियों को संरक्षित किया जा सके।

अदालत ने इसके लिए 'राष्ट्र के माता-पिता' के अधिकार क्षेत्र का किया उपयोग

हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने तहसीलदार स्तर के एक पूर्व अधिकारी की याचिका पर अपने हालिया आदेश में प्रकृति के संरक्षण को विशेष महत्व देते हुए उक्त टिप्पणी की है। अधिकारी के खिलाफ 'वन पोरमबोक भूमि' के रूप में वर्गीकृत सरकारी जमीन का पट्टा कुछ लोगों के नाम करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी, जिसे रद करने के लिए उसने हाई कोर्ट में अपील दायर की थी।

मदुरै पीठ ने कहा, प्रकृति का अंधाधुंध विनाश इको सिस्टम में कई जटिलताएं पैदा करेगा

थेनी के रहने वाले ए. पेरियाकरूपन की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रकृति का अंधाधुंध विनाश पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) में कई जटिलताएं पैदा करेगा और वनस्पतियों और जीवों (फ्लोरा और फौना) के अस्तित्व को खतरे में डालेगा। पेरियाकरुपन को जबरन सेवानिवृत्ति दे दी गई थी।

जस्टिस एस श्रीमति ने अपने आदेश में नैनीताल हाई कोर्ट के एक पूर्व के फैसले का हवाला भी दिया, जिसमें अदालत ने 'राष्ट्र के माता-पिता के अधिकार क्षेत्र' का उपयोग करते हुए गंगोत्री और यमुनोत्री नदियों समेत ग्लेशियर को संरक्षित करने के लिए कानूनी संस्थाओं के रूप में घोषित किया था।

अब जीवित व्यक्ति की तरह प्रकृति के सभी संबंधित अधिकारों, कर्तव्यों और देनदारियों का होगा संरक्षण

पिछली पीढ़ी ने प्राचीन महिला के साथ धरती मां को सौंपा न्यायाधीश ने कहा कि पिछली पीढ़ि‍यों ने हमें धरती मां को उनकी प्राचीन महिला के साथ सौंपा है और हम उसी रूप में इसे अगली पीढ़ी को सौंपने के लिए नैतिक रूप से बाध्य हैं। 'मदर नेचर' तो जीवित व्यक्ति घोषित करने का सही समय जज ने कहा कि 'मदर नेचर' को जीवित व्यक्ति घोषित करने का यह सही समय है। जीवित व्यक्ति घोषित करने से प्रकृति को भी सुरक्षा, संरक्षा और पुनरुत्थान के लिए सभी मौलिक, कानून और संवैधानिक अधिकार मिल गए हैं।


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