विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 09, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

ट्रंप के टैरिफ से एक्सपोर्ट पर पड़ेगा कितना असर, महंगाई के क्या हैं आसार? RBI गवर्नर ने बताई सारी बात

Published: Wed, 09 Apr 2025 06:44 PM (IST)

RBI Governor On Trump Tariff Impact On India ट्रंप के टैरिफ से वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी है जिसका असर भारत की ...और पढ़ें

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (Photo - PTI)
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा (Photo - PTI)

HighLights

  1. शुल्क बढ़ने से निर्यात पर असर पड़ना संभव: आरबीआई गवर्नर
  2. महंगाई पर बहुत ज्यादा असर पड़ने को लेकर कोई खास चिंता नहीं
  3. टैरिफ बढ़ने से शुद्ध निर्यात पर नकारात्मक असर होता है: आरबीआई

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि हाल ही में अमेरिकी सरकार की तरफ से घोषित शुल्क नीति ने वैश्विक अनिश्चतता को बढ़ा दिया है जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ ही भारत की इकोनॉमी और यहां महंगाई की स्थिति पर भी असर पड़ना तय है।

उन्होंने कहा कि अभी जिस तरह की अनिश्चिता है उससे निवेश भी प्रभावित होती है और उद्योग जगत व आम आदमी का खर्चा संबंधी फैसला भी प्रभावित होता है। 

उन्होंने इसका असर देश की आर्थिक विकास दर पर भी पड़ने की बात कही है लेकिन चालू वित्त वर्ष के दौरान कृषि क्षेत्र की स्थिति बेहतर रहने की संभावना है। इससे विकास दर की गिरावट को थामने में मदद मिलेगा।

महंगाई को लेकर आरबीआई ज्यादा आत्मविश्वास में है। हाल के महीनों में महंगाई को नीचे लाने में जो सफलता मिली है, उसकी वजह से केंद्रीय बैंक के लिए ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट तौर पर फैसला करने में मदद मिलने की बात गवर्नर मल्होत्रा ने स्वीकार की है।

सालाना विकास दर को लेकर क्या है उम्मीद?

  • आरबीआई ने वर्ष 2025-26 में सालाना विकास दर 6.5 फीसद रहने का अनुमान लगाया है जो पहले के अनुमान 6.7 फीसद से 0.20 फीसद कम है।
  • पहली तिमाही में 6.5 फीसद, दूसरी तिमाही 6.7 फीसद, तीसरी तिमाही में 6.6 फीसद और चौथी तिमाही में 6.3 फीसद की विकास दर की संभावना जताई गई है। लेकिन अभी बहुत कुछ बदल भी सकता है।

मौद्रिक नीति की भूमिका बहुत अहम

गवर्नर मल्होत्रा ने कहा, 'वैश्विक इकोनॉमी की मौजूदा स्थिति असाधारण तौर पर अनिश्चतता से भरी हुई है। अभी मुश्किल यह है कि इस बेहद शोर-शराबे वाले माहौल में सही क्या होगा, इसका संकेत कैसे निकाला जाए? अर्थव्यवस्था को सही दिशा में रखने में मौद्रिक नीति बहुत अहम भूमिका निभा सकता है।'

अमेरिका से कारोबार को लेकर बातचीत

आरबीआई गवर्नर ने यह भी कहा है कि टैरिफ बढ़ने से शुद्ध निर्यात पर नकारात्मक असर होता है। लेकिन अभी कई तरह की अनिश्चितता है, जैसे शुल्क कितना होगा, हमारे निर्यात में किस तरह का बदलाव होता है, आयात मांग कैसी रहती है। भारत सरकार अमेरिका से कारोबार को लेकर बातचीत कर रही है। इससे विपरीत असर को कम किया जा सकता है।

महंगाई को लेकर कोई खास चिंता नहीं

हालांकि, महंगाई को लेकर आरबीआई अब ज्यादा सकारात्मक दिख रहा है। गवर्नर मल्होत्रा के मुताबिक, वैश्विक कारोबार व अनिश्चितता से वैश्विक विकास दर पर असर पड़ने की आशंका है लेकिन इसका घरेलू महंगाई पर बहुत ज्यादा असर पड़ने को लेकर कोई खास चिंता नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा है कि अगर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ती है तो बाहर से महंगाई देश में प्रवेश कर सकती है लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की वजह से क्रूड व दूसरी जींसों की कीमतों में नरमी आ सकती है।

महंगाई की दरें ज्यादा तेजी से कम हुई

इस आधार पर वर्ष 2025-26 के लिए आरबीआई ने महंगाई दर के चार फीसद रहने का लक्ष्य रखा है। वैसे अभी महंगाई की दरें हमारी उम्मीदों से भी ज्यादा तेजी से कम हुई हैं। आरबीआई वैधानिक तौर पर सालाना महंगाई की दर को चार फीसद (अधिकतम दो फीसद उपर या दो फीसद नीचे) पर रखने की कोशिश करता है।

यह भी पढ़ें: 'महाभारत का संजय नहीं, जो भविष्य देख सकूं', RBI गवर्नर Sanjay Malhotra ने क्यों कही ऐसी बात?