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 'कनेक्शन और सेटिंग वाला बैंकिंग युग समाप्त', वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का राहुल गांधी पर वार 

Published: Fri, 30 Oct 2026 11:16 PM (IST)

राहुल गांधी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच आईडीबीआई बैंक की बिक्री को लेकर एक्स पर तीखी बहस हुई।

वित्त मंत्री सीतारमण का राहुल को करारा जवाब

वित्त मंत्री सीतारमण का राहुल को करारा जवाब

HighLights

  1. राहुल गांधी और निर्मला सीतारमण में आईडीबीआई बैंक बिक्री पर जुबानी जंग।

  2. सीतारमण ने कांग्रेस के 'कनेक्शन वाली बैंकिंग' युग को समाप्त बताया।

  3. एनडीए सरकार ने आईडीबीआई बैंक को खस्ताहाल से पुनर्जीवित किया।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। टाटा मामले के बाद अब आइडीबीआइ की बिक्री मामले को लेकर एक बार फिर से प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच एक्स पर नोंक-झोंक हुई। शुक्रवार को एक्स प्लेटफार्म पर राहुल गांधी के पोस्ट पर सीतारमण ने करारा जवाब दिया।

वित्त मंत्री ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि कैसे राफेल के संबंध में आपके झूठ विफल और बेनकाब हुए थे। आपको माफी मांगनी पड़ी थी। आइडीबीआई मामले में भी आपको माफी मांगनी होगी।

आइडीबीआई की बिक्री को लेकर राहुल के कटाक्ष पर सीतारमण ने कहा कि कांग्रेस-युग की बैंकिंग में ताकतवर लोगों के लिए फोनबुक और आम नागरिकों के लिए नियम-बुक होती थी। 'कनेक्शन और सेटिंग वाली बैंकिंग' युग अब समाप्त हो गया है।

आम लोगों की अब ऋण तक आसान पहुंच है और कर्मचारियों पर फोन कॉल पर ऋण देने का दबाव नहीं है। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा था कि कांग्रेस के जमाने में उद्योग की मदद के लिए आइडीबीआइ बैंक खड़ा किया गया।

मोदी के समय में पहले बोली देखी गई और फिर दाम तय हुआ। कांग्रेस के समय बैंक बनते थे, मोदी के समय बैंक बिकते हैं। राहुल ने यह भी कहा कि मैं आइडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूं।

इस पर वित्त मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि कांग्रेस के कार्यकाल में बैंकों और वित्तीय संस्थानों का इस्तेमाल अपनी निजी संस्थाओं के रूप में किया गया और विवेकपूर्ण ऋण मानदंडों को दरकिनार करते हुए बैंक कर्मचारियों पर अपनी इच्छा के अनुसार ऋण देने का दबाव डाला गया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1957 में कांग्रेस नेताओं के प्रभाव के कारण हरिदास मूंदड़ा को एलआईसी से पैसा मिला। वर्ष 1976 में इंदिरा गांधी की सरकार ने एसबीआइ के अध्यक्ष आर.के. तलवार को तब हटा दिया, जब उन्होंने संजय गांधी के करीबी से जुड़ी एक कंपनी के लिए ऋण शर्तों में ढील देने के राजनीतिक दबाव को मानने से इनकार कर दिया था।

मारुति को दिए जाने वाले ऋणों को लेकर संजय गांधी ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर दबाव डाला। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के कार्यकाल में वित्त राज्य मंत्री रहे बी. जनार्दन पुजारी ने 1980 के दशक में बैंक कर्मचारियों पर ऋण जारी करने का दबाव डाला।

यूपीए के कार्यकाल में एक मंत्री के रूप में पवन कुमार बंसल ने अपने परिवार से जुड़े व्यवसायों को ऋण देने के लिए केनरा बैंक पर दबाव डाला। वित्त मंत्री ने कहा कि आईडीबीआई बैंक हमें खस्ताहाल स्थिति में सौंपा गया था। क्योंकि आईडीबीआई बैंक को कांग्रेस के नेताओं से घनिष्ठ संबंध रखने वाले बड़े व्यापारिक समूहों जैसे वीडियोकॉन, विनसम, एबीजी शिपयार्ड, किंगफिशर आदि को ऋण देने के लिए मजबूर किया गया था।

ये 'बैड लोन' में बदल गए, जिससे आईडीबीआई बैंक को भारी नुकसान हुआ, जिसे हमने पहचाना। एनडीए सरकार ने व्यावसायिकता, विवेक और 25,000 करोड़ रुपये से अधिक के पुनर्पूंजीकरण के माध्यम से आईडीबीआई बैंक को पुनर्जीवित किया।

बैंक अब अपने विकास के अगले चरण के लिए तैयार है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन में सभी उचित प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और हमने इसे पहले ही स्पष्ट कर दिया है।

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