नई दिल्ली। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को रामनाथ कोविंद को बिहार और आचार्य देवव्रत को हिमाचल प्रदेश का नया राज्यपाल नियुक्त कर दिया। दलित समुदाय से आने वाले कोविंद पेशे से वकील और दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। विधानसभा चुनाव से ऐन पहले इस नियुक्ति को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, अनुसूचित जाति के एक नेता को राजभवन भेजकर भाजपा इस समुदाय में अपना जनाधार मजबूत करना चाहती है। इस बीच, नए राज्यपाल की नियुक्ति पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भड़क गए हैं। इस मुद्दे पर परंपरा का हवाला देते हुए उन्होंने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने भी कहा कि राज्य सरकार को बिना बताए नए राज्यपाल की नियुक्ति कर केंद्र ने सही काम नहीं किया है।

पत्रकारों से बात करते हुए नीतीश ने कहा कि अब तक की परंपरा के अनुसार नए राज्यपाल की नियुक्ति पर गृह मंत्री राज्य के मुख्यमंत्री से चर्चा करते हैं। लेकिन इस बार मुझसे कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया। विधानसभा चुनाव से पहले बिहार के लोगों से मिलने आए नीतीश ने कहा कि मुझे भी इस नियुक्ति के बारे में मीडिया से ही जानकारी मिली है।

उधर, राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर कोविंद ने कहा कि बिहार जैसे महत्वपूर्ण प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी के पास बिहार और राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के पास हिमाचल प्रदेश की अतिरिक्त जिम्मेदारी थी।

संसद में मुद्दा उठाएगा जदयू

नए राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर केंद्र सरकार पर हमला करते हुए जदयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि यह देश के संघीय ढांचे का उल्लंघन है। यह सरकारिया आयोग की सिफारिशों के खिलाफ है और केंद्र सरकार इस तरह से राज्य सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रही है। उसकी मंशा सिर्फ तात्कालिक राजनीतिक लाभ लेने की है। त्यागी ने कहा कि हम अन्य विपक्षी दलों से बातचीत कर रहे हैं और यह मुद्दा संसद में भी उठाया जाएगा।

नए राज्यपालों का परिचय

-रामनाथ कोविंद

-69 वर्षीय कोविंद उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं।

-1994 से 2006 के बीच लगातार दो बार राज्यसभा के सांसद रह चुके हैं।

-भाजपा दलित मोर्चा और अखिल भारतीय कोली समाज के अध्यक्ष रह चुके हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं।

-आचार्य देवव्रत

-56 वर्षीय देवव्रत वर्ष 1981 से 'गुरुकुल कुरुक्षेत्र' के प्राचार्य हैं।

-इतिहास और हिंदी में स्नातकोत्तर। प्राकृतिक चिकित्सा व योग विज्ञान में डॉक्टरेट।

-सामाजिक कार्यों के लिए अमेरिकन बायोग्राफिकल इंस्टीट्यूट से 'अमेरिकन मेडल ऑफ ऑनर' दिया जा चुका है।

Posted By: Rajesh Niranjan