रामेंद्र सिंह परिहार, ग्वालियर। सड़क हादसे में छोटे भाई को खोने के बाद एक सिविल इंजीनियर रोज शाम को तीन घंटे चौराहे पर केवल इसलिए खड़ा होता है ताकि लोगों को यातायात नियमों का महत्व समझा सके। साथ ही यह भी बता सके कि कैसे एक नियम तोड़ना किसी की जान पर भारी पड़ जाता है।

यातायात नियमों को समझाने का ढंग है निराला

उनके समझाने का ढंग भी निराला है। वह न तो नियम तोड़ने वालों से बहस करते हैं और न ही विवाद। बस बिना कुछ कहे नियम तोड़ने वालों को एक पोस्टर दिखाते हैं। इसमें यातायात नियम पालन करने की अपील लिखी होती है।

नियम तोड़ने वाले ने मेरा हंसता खेलता भाई छीन लिया, ऐसी आप गलती न करें

लोग पूछते हैं तो उन्हें बता भी देते हैं कि ऐसे ही नियम तोड़ने वाले ने उनसे उनका हंसता खेलता भाई छीन लिया और इसी तरह की गलती आप करने जा रहे हैं। तीन साल से लगातार खड़े होकर जागरूक करने का नतीजा भी दिखने लगा है। जहां प्रवीण खड़े होते हैं उस चौराहे पर सड़क हादसों की संख्या में कमी आई है। लोग नियमों का पालन भी करने लगे हैं।

मेरे भाई को गलत दिशा से आए ट्रक ने कुचल दिया था- इंजीनियर भाई

ये जुनूनी सिविल इंजीनियर हैं मध्य प्रदेश के ग्वालियर के 39 वर्षीय प्रवीण गोस्वामी। वर्ष 2006 में उनके छोटे भाई नवीन को भिंड रोड पर गलत दिशा से आए ट्रक ने कुचल दिया था।

भाई की मौत से आहत प्रवीण ने हादसों को रोकने की दिशा में काम करने की ठानी

भाई की मौत ने प्रवीण को इतना आहत किया कि उन्होंने ठान लिया कि वे यातायात नियमों के लिए लोगों को जागरूक कर हादसों को रोकने की दिशा में काम करेंगे। उन्होंने बेंगलुरू से मिले जॉब के ऑफर को भी ठुकरा दिया और निजी कंपनी में काम करने लगे, लेकिन जागरूकता के लिए उन्हें समय नहीं मिल पा रहा था इसलिए खुद का काम शुरू कर दिया।

विजयाराजे सिंधिया तिराहे पर यातायात नियमों के प्रति जागरूकता

प्रवीण ने इंटीरियर डेकोरेशन व कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया। काम चल निकला तो पहला लक्ष्य शहर के लोगों को यातायात के लिए जागरूक करने का बनाया। ग्वालियर के भारी यातायात वाले विजयाराजे सिंधिया तिराहा (यूनिवर्सिटी तिराहा) पर वह खड़े होने लगे।

तीन साल से जारी है अभियान

खुद सिविल इंजीनियर होने के साथ ही प्रवीण ने पहले यातायात नियमों का गहन अध्ययन किया और महसूस किया कि उनकी ज्यादा जरूरत यूनिवर्सिटी तिराहे पर है। वह यहां प्रतिदिन तीन घंटे का समय लोगों को जागरूक करने के लिए देते हैं। कभी सुबह तो कभी शाम को वह यहां पर ट्रैफिक पुलिस की मदद के लिए भी तैयार रहते हैं।

बोलने से होता है विवाद, चुप रहकर सिखा रहे नियमों का पालन

प्रवीण का तरीका भी बेहद नायाब है। किसी से विवाद न हो इसके लिए उन्होंने जागरूकता के लिए बोलने की बजाय मूक रहकर संदेश देने की योजना बनाई। वह अपने हाथों में संदेश लिखी तख्तियां व पोस्टर लेकर खड़े होते हैं। जैसे ही कोई वाहन चालक नियम तोड़ता है या तोड़ने का प्रयास करता है वह सामने आकर एक तख्ती दिखा देते हैं। इस पर जिक्र होता है कि कैसे एक नियम तोड़ने से उन्होंने अपना भाई खो दिया। आपका भी घर पर कोई चहेता इंतजार कर रहा है। शुरुआत में उन्हें लोगों ने सिरफिरा समझा, लेकिन बाद में उन्हें सराहना मिलने लगी। जब वह चौराहे पर खड़े होते हैं तो कई बार वाहन चालक उन्हें गुलाब का फूल या चॉकलेट देकर निकल जाते हैं।

सड़क हादसे हुए कम

प्रवीण के प्रयास रंग लाने लगे हैं। वर्ष 2017 में चौराहे और उसके आसपास 50 के लगभग हादसे हुए और तीन लोगों की जान गई, जबकि 2018 में यहां करीब 40 हादसे हुए और दो लोगों की जान गई थी। वर्ष 2019 में करीब 19 सड़क हादसे हुए। ये ज्यादा गंभीर नहीं थे और किसी की जान नहीं गई। यहां नियम तोड़ने पर बनने वाले ट्रैफिक चालान की संख्या भी कम हुई है। अब प्रवीण दूसरे किसी चौराहे पर यह अभियान शुरू करेंगे।

भाई की मौत के बाद मन में आया कि मैंने जो खोया है वह किसी और को नहीं खोने दूंगा। लोगों की जान बचाने के लिए संघर्ष करता रहूंगा। अब लोग मुझे समझने लगे हैं और बात मानने भी लगे हैं-प्रवीण गोस्वामी, सिविल इंजीनियर।

प्रवीण ने ट्रैफिक पुलिस की मदद के लिए यह अभियान शुरू किया है। कैसा भी मौसम हो, सर्दी, गर्मी या बारिश वह तीन घंटे अपना काम करते हैं। उनकी मदद से यातायात जागरूकता में मदद मिली है-नरेश, डीएसपी ट्रैफिक, ग्वालियर, मप्र।

Posted By: Bhupendra Singh

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