नई दिल्ली, [जागरण स्पेशल]। देशभर में टेरर फंडिंग मामले पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े लोगों पर एनआईए की छापेमारी हो रही है। पीएफआई से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। आइये जानते हैं पीएफआई क्या है। यह समय-समय पर सुर्खियों में क्यों बना रहता है। पीएफआई में हमेशा अपराध से जुड़ी हुई घटनाएं क्यों सामने आती हैं।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) खुद को एक ऐसे संगठन के रूप में बताता है, जो वंचित और दलितों और बड़े पैमाने पर राष्ट्र के सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक सशक्तिकरण की उपलब्धि की दिशा में काम करता है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया पीएफआई 2006 में तब चर्चा में आया था, जब दिल्ली के रामलीला मैदान में नेशनल पॉलिटिक्स कांफ्रेंस का आयोजन किया गया था। तब रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में उपस्थिति दर्ज हुई थी। यह माना जाता है कि पीएफआई की पूरी राजनीति मुस्लिमों के इर्द-गिर्द ही चलती है। देश के 23 ऐसे राज्य हैं, जहां पीएफआई अपनी गतिविधियां चला रहा है। यह संगठन खुद को न्याय, स्वतंत्रता और सुरक्षा का पैरोकार बताता है।

एनडीएफ से बना पीएफआई

लेकिन यह भी विवादास्पद है कि नेशनल डेवलपमेंट फंड (NDF) से पीएफआई बना है। नेशनल डेवलपमेंट फंड 1994 में केरल में स्थापित किया गया था। एनडीएफ को बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना के दो साल बाद मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया था। जैसे-जैसे केरल में एनडीएफ की लोकप्रियता बढ़ी, वैसे-वैसे इस पर सांप्रदायिक गतिविधियों के आरोप भी लगे। 2003 में इसके कुछ सदस्यों को केरल के कोझीकोड के मराद में आठ हिंदुओं की हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

वहीं, 22 नवंबर 2006 को NDF का तमिलनाडु की मनिथा नीथी पासराय (Manitha Neethi Pasarai, MNP) और कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी (Karnataka Forum for Dignity, KFD) के साथ विलय कर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) बनाया गया।

एमएनपी और केएफडी दोनों को अल्पसंख्यक अधिकारों और अन्य सामाजिक कारणों से संबंधित मुद्दों पर काम करने के एजेंडे के साथ स्थापित किया गया था। दोनों संगठनों पर भी आतंकवादी घंटनाओं से जुड़े होने का आरोप लगाया गया था।

PFI में इन संगठनों का हुआ विलय

अगले कुछ सालों में पीएफआई की ताकत कई अन्य संगठनों के रूप में बढ़ी है। गोवा स्थित नागरिक फोरम, राजस्थान की सामुदायिक सामाजिक और शैक्षिक सोसायटी, पश्चिम बंगाल की नागरिक अधिकार सुरक्षा समिति, मणिपुर की लिलोंग सोशल फोरम और आंध्र प्रदेश के सामाजिक न्याय संघ का इस संगठन के साथ विलय हो गया।

2009 में इस संगठन ने मुसलमानों, दलितों, पिछड़े वर्गों और आदिवासियों सहित सभी नागरिकों की उन्नति और समान विकास के लड़ने के लिए अपनी राजनीतिक शाखा एसडीपीआई शुरू की है। इसका नेतृत्व ई अबूबकर ने किया था। 

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan

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