CM विजय ने कैसे लगाई AIADMK में सेंध, 25 विधायकों को तोड़ने वाले एसपी वेलुमणि कौन?
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत हासिल कर लिया, जिसमें उन्हें 144 विधायकों का समर्थन मिला। इस दौरान एआईएडीएमके में बड़ी सेंधमारी हुई।
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टीवीके और विजय फ्लोर टेस्ट में हुए पास।

समय कम है?
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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। तमिलनाडु विधानसभा के पटल पर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने आज बुधवार को अपनी सरकार का बहुमत साबित कर दिया।
फ्लोर टेस्ट में टीवीके सरकार को 144 विधायकों का समर्थन मिला। विरोध में 22 वोट पड़े और पांच विधायकों ने वोटिंग नहीं की। इसके अलावा, प्रमुख विपक्षी पार्टी डीएमके ने वॉकआउट किया।
डीएमके का वॉक आउट
यह मतदान भारी राजनीतिक गहमागहमी के बीच हुआ, जिसमें डीएमके और डीएमडीके के विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जबकि पीएमके के चार विधायकों और बीजेपी के एक विधायक ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
डीएमके के वॉकआउट करने के बाद और साथ ही पांच विधायकों के वोट न देने के कारण मौजूद और वोट करने वाले विधायकों की संख्या कम हो गई। डीमके के पास 57 विधायकों की ताकत है।
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विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने सदन की कार्यवाही के दौरान डीएमके के वॉकआउट की घोषणा की और कांग्रेस सहित डीएमके के पूर्व सहयोगियों द्वारा टीवीके को दिए गए समर्थन को लेकर उन पर तंज कसा।
स्टालिन ने कहा, “हम विधानसभा से बाहर जा रहे हैं। हमारे बाहर जाते ही, आपको बहुमत मिल जाएगा। इसका इस्तेमाल करके अच्छे से शासन करें।” साथ ही सरकार से आग्रह किया कि वह पिछली सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं का राजनीतिकरण न करे।
सदन में देखने को मिला बड़ा उलफेर
इन सबके बीच सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला कि दिवंगत नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की पार्टी एआईएडीएमके में सीएम विजय ने बड़ी सेंधमारी कर दी। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर रही एआईएडीएमके करीब-करीब दो हिस्सों में टूट चुकी है।
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हालांकि यह टूट बराबरी पर नहीं हुई है और बागी गुट के पास दो तिहाई समर्थन हासिल नहीं है तो ऐसे में टूट का औपचारिक एलान फिलहाल संभव नहीं लगता है।
कौन हैं एसपी वेलुमणि?
विधानसभा अध्यक्ष ने पलानीस्वामी और वेलुमणि दोनों को ही विधानसभा की पहली कतार में अलग-अलग सीटें आवंटित कर दी गई हैं। इससे पहले विरोधी गुट के करीब 30 विधायकों ने प्रोटेम स्पीकर को एक याचिका सौंपी, जिसमें एस पी वेलुमणि को विधायक दल के नेता के तौर पर मान्यता देने की मांग की गई। वहीं 17 विधायकों ने एक अलग पत्र के जरिए पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी का समर्थन किया।
दो फाड़ हुई एआईएडीएमके!
एआईएडीएमके में दो फाड़ की पहली तस्वीर तब देखने को मिली जब पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक 17वीं विधानसभा के पहले सत्र में शामिल होने के लिए पहुंचे।
AIADMK विधायक दल में पलानीस्वामी के 30 साथियों ने नेता के तौर पर उनके नाम का प्रस्ताव रखने से इनकार कर दिया। इसके चलते पलानीस्वामी अल्पमत में आ गए और उन्हें केवल 17 विधायकों का समर्थन ही मिल पाया। इस गुट का नेतृत्व एसपी वेलुमणि और सीवी षणमुगम कर रहे थे।
इसके बाद, इस गुट ने जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार को अपना समर्थन देने की घोषणा कर दी। अब, विधानसभा अध्यक्ष ने पलानीस्वामी और वेलुमणि दोनों को ही विधानसभा की पहली कतार में अलग-अलग सीटें आवंटित कर दी हैं।
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मंगलवार और बुधवार के बीच, पलानीस्वामी पांच विधायकों को वापस अपने पाले में लाने में कामयाब रहे, जिससे बागी गुट के विधायकों की संख्या घटकर 25 रह गई। लेकिन यह तथ्य कि AIADMK के इन 25 विधायकों ने विजय के पक्ष में वोट दिया और केवल 22 ने टीवीके सरकार के खिलाफ वोट दिया, यह दर्शाता है कि पलानीस्वामी के पास अब विधायक दल के भीतर बहुमत नहीं रहा।
यह भी साफ है कि यह बगावत सिर्फ विधायक दल तक ही सीमित नहीं रहेगी। जिस तरह से दोनों खेमे एक-दूसरे के खिलाफ तलवारें ताने खड़े हैं, उससे जाहिर है कि पूरी पार्टी अब पलानीस्वामी के नेतृत्व में बार-बार मिल रही असफलताओं को और बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है।
विजय को ऐसे मिला 144 विधायकों का समर्थन
विश्वास मत की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस, सीपीएम, विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), और एआईएडीएमके के एक बागी गुट ने टीवीके सरकार को समर्थन दिया, जिससे सीएम विजय तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट आसानी से जीत गए।

234 सदस्यों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा छूने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। हालांकि टीवीके ने 108 सीटें जीती हैं लेकिन सीएम विजय ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था तो ऐसे में उनको एक सीट छोड़नी पड़ी। अब पार्टी की प्रभावी संख्या घटकर 107 रह गई।
इससे पार्टी बहुमत के आंकड़े से 11 सीटें पीछे रह गई। फिर पांच सीट जीतने वाली कांग्रेस सबसे पहले टीवीके को समर्थन देने के लिए आगे आई और डीएमके के साथ अपना पुराना गठबंधन तोड़ दिया। दो-दो सीटों वाली सीपीआई और सीपीएम ने भी विजय को समर्थन देने की घोषणा की।
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फिर गठबंधन से दूरी बनाने वाली वीसीके और आईयूएमएल कई दिनों की बातचीत के बाद आखिरकार टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने पर सहमत हो गई। इसके अलावा, टीवीके को अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कजगम (AMMK) के विधायक एस. कामराज से भी समर्थन मिला।
गठबंधन की ताकत आखिरकार बढ़कर 121 सीटें हो गई, फिर एआईएडीएमके के बागियों ने भी विजय के समर्थन में वोट किया और ऐसे में विजय आसानी से विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर पाए।
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