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अजीत पवार का प्लेन कैसे क्रैश हुआ था? बारामती विमान हादसे पर AAIB की जांच रिपोर्ट में खुलासा

Published: Sun, 01 Mar 2026 12:22 AM (IST)

विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने कम दृश्यता, मौसम संबंधी सुविधाओं की कमी, परिचालन संबंधी खामियों और सुरक्षा संबंधी सावधानियों ...और पढ़ें

अजीत पवार का प्लेन कैसे क्रैश हुआ था? बारामती विमान हादसे पर AAIB की जांच रिपोर्ट में खुलासा

अजीत पवार का प्लेन कैसे क्रैश हुआ था? बारामती विमान हादसे पर AAIB की जांच रिपोर्ट में खुलासा

HighLights

  1. बारामती हवाई अड्डा एक अनियंत्रित हवाई क्षेत्र है

  2. रनवे पर आखिरी बार मार्च 2016 में कुछ सुधार किया गया था

राज्य ब्यूरो, मुंबई। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने कम दृश्यता, मौसम संबंधी सुविधाओं की कमी, परिचालन संबंधी खामियों और सुरक्षा संबंधी सावधानियों की कमी को दुर्घटना के कारणों के रूप में इंगित किया है। 28 जनवरी 2026 को बारामती हवाई अड्डे पर हुए लेयरजेट विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राकांपा अध्यक्ष अजीत पवार सहित पांच लोगों की जान चली गई थी।

बारामती हवाई अड्डा एक अनियंत्रित हवाई क्षेत्र है

लीयरजेट 45 एक्सआर विमान बारामती विमानतल के निकट 28 जनवरी, 2026 को सुबह 8.46 बजे धराशायी हो गया था। बारामती हवाई अड्डा एक अनियंत्रित हवाई क्षेत्र है जिसका प्रबंधन महाराष्ट्र हवाई अड्डा विकास कंपनी (एमएडीसी) द्वारा किया जाता है। यह हवाई अड्डा मुख्य रूप से उड़ान प्रशिक्षण कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है, जिसमें दो उड़ान प्रशिक्षण संगठनों (एफटीओ) का अड्डा बारामती में स्थित है।

वहां दो अस्थायी एटीसी टावर थे, जिनमें से प्रत्येक का संचालन और रखरखाव एफटीओ के छात्रों और प्रशिक्षकों द्वारा उनकी संबंधित उड़ान संचालन और वीआईपी उड़ानों के लिए किया जा रहा था। एएआईबी की रिपोर्ट में कमियों की ओर इशारा करते हुए बताया गया है कि हवाई अड्डे पर विंड सॉक्स के अलावा कोई अन्य नेविगेशनल सहायता मौजूद नहीं हैं।

इसमें कहा गया है कि हवाई अड्डे पर दो विंडसॉक लगाए गए हैं, दोनों रनवे 29 की तरफ हैं। रनवे 11 की तरफ कोई विंडसॉक उपलब्ध नहीं था, क्योंकि वह एक टेबल-टॉप रनवे है। रनवे पर आखिरी बार मार्च 2016 में कुछ सुधार किया गया था। उसके बाद से कोई काम नहीं हुआ, जिसके परिणामस्वरूप रनवे पर बने सभी निशान मिट गए हैं और सतह पर बजरी के टुकड़े बिखरे पड़े हैं।

हवाई अड्डे के चारों ओर कोई चारदीवारी नहीं है

हवाई अड्डे के चारों ओर कोई चारदीवारी नहीं है। मौजूदा बाड़ पर्याप्त नहीं है और पूरे हवाई अड्डे को कवर नहीं करती है। रिपोर्ट में संभावित सुरक्षा समस्याओं की ओर इशारा करते हुए कहा गया है कि दुर्घटना वाले दिन टावर पर एफटीओ के एक ग्राउंड इंस्ट्रक्टर मौजूद थे, जो लैंडिंग में सहायता के लिए विमान से संवाद कर रहे थे।

बारामती के पास पहुँचते समय वीटी-एसएसके की चालक टीम ने दृश्यता के बारे में पूछा, जिस पर टावर ने दृश्यता मार्करों को देखकर 3,000 मीटर की दृश्यता बताई। इसके अलावा लैंडिंग की अनुमति देते समय, टावर ने हवा के शांत होने की जानकारी दी।

इस प्रकार विमान के उतरने के समय बारामती में दर्ज दृश्यता वीएफआर उड़ान के लिए आवश्यक न्यूनतम दृश्यता (5000 मीटर) से काफी कम थी। उस समय उस स्थान पर मौसम के बारे में एएआईबी ने इनसैट 3डीआर डेटा के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि वहां पुणे और उसके आसपास के इलाकों में कोई खास बादल नहीं दिख रहे हैं। हालांकि पुणे हवाई अड्डे से 120 डिग्री के दायरे में और 81 किलोमीटर की दूरी पर छिटपुट रूप से बहुत हल्की धुंध की उपस्थिति का अनुमान लगाया गया था।

अंतिम बातचीत

दूसरी बार जमीन दिखाई देने की सूचना विमान ने दी, तो बारामती टावर ने विमान को रनवे पर उतरने की अनुमति दे दी। टावर ने यह भी बताया कि हवा शांत है। बाद में विमान को "ओह शिट... ओह शिट..." कहते हुए सुना गया, जिसके बाद विमान रनवे के बाईं ओर, रनवे के किनारे दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

सीसीटीवी फुटेज

सीसीटीवी फुटेज के आधार पर निष्कर्ष निकालते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि विमान जमीन से टकराने से पहले दाईं ओर मुड़ा था। रिपोर्ट में कहा गया है, विमान जमीन से टकराने से पहले पेड़ों से टकराया, जो रनवे की सतह से कम ऊंचाई पर हैं।

दोनों रिकॉर्डर क्षतिग्रस्त

दोनों फ्लाइट रिकॉर्डर - सॉलिड-स्टेट फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (एसएसएफडीआर) और सॉलिड-स्टेट कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (एसएससीवीआर) – विमान में भीषण आग लगने के कारण क्षतिग्रस्त हो गए थे। क्योंकि दुर्घटना के दौरान तापमान बहुत अधिक था।