चंद्रनाथ रथ हत्याकांड के संदिग्धों तक कैसे पहुंची बंगाल पुलिस? एक UPI पेमेंट ने जाल में फंसाया
पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में पुलिस ने यूपीआई टोल पेमेंट के सुराग से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है।

चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में पकड़ा गया आरोपी राज सिंह।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी और उनके निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई खुलासे हो रहे हैं। निवेदिता सेतु पर एक टोल प्लाजा पर की गई यूपीआई पेमेंट हत्या की जांच कर रही पुलिस के लिए अहम सुराग बन गया।
पुलिस ने उत्तर प्रदेश और बिहार से तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और संकेत दिया है कि इस हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम देने में कम से कम आठ लोग शामिल थे।
पुलिस को कैसे मिली सफलता?
चंद्रनाथ रथ भारतीय वायु सेना के पूर्व कर्मी भी थे और अधिकारी के निजी सहायक के तौर पर काम करते थे। उनकी 6 मई की रात को उत्तरी 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में उनके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
हत्या की जांच कर रही एक विशेष जांच टीम (SIT) ने बताया कि आरोपियों का पता डिजिटल निगरानी, सीसीटीवी फुटेज और अंतर-राज्यीय तकनीकी जानकारियों के जरिए लगाया गया, जिससे जांचकर्ता पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिशा तक पहुंचे।
एक अधिकारी ने बताया, “यह एक बड़ी सफलता है। जांच से पता चला कि हमलावर पश्चिम बंगाल के बाहर के थे। तकनीकी निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और अन्य जानकारियों के आधार पर एसआईटी की टीमों को उत्तर प्रदेश और बिहार भेजा गया। तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनमें से एक के शार्पशूटर होने का संदेह है।”
यूपीआई ट्राजैक्शन को किया ट्रैक
पुलिस ने बताया कि मयंक राज मिश्रा और विक्की मौर्य को बिहार के बक्सर से हिरासत में लिया गया और उत्तर प्रदेश के रहने वाले राज सिंह को अयोध्या के कोतवाली इलाके से हिरासत में लिया गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि मूल रूप से बलिया का रहने वाला राज सिंह पर शक है कि उसके इस अपराध में इस्तेमाल हुए लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से संबंध हैं।
पुलिस के अनुसार, यह सफलता तब मिली जब पुलिस ने हत्या से कुछ समय पहले निवेदिता सेतु पर स्थित बैली टोल प्लाजा पर किए गए एक यूपीआई ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया।
संदिग्ध फरार कार में सवार लोगों में से एक ने कथित तौर पर कैश या FASTag का इस्तेमाल करने के बजाय डिजिटल तरीके से टोल का भुगतान किया, जिससे जांचकर्ताओं को आरोपी से जुड़े एक मोबाइल नंबर की पहचान करने में मदद मिली।
अधिकारी ने कहा, "उस डिजिटल भुगतान से जांचकर्ताओं को संदिग्धों में से एक की पहचान स्थापित करने में मदद मिली। इस सुराग ने आखिरकार हमारी टीमों को उत्तर प्रदेश और बिहार तक पहुंचा दिया।"
कई दिनों की रेकी के बाद की गई हत्या
पुलिस ने बताया कि ऐसा लगता है कि यह हत्या कई दिनों की रेकी के बाद मिलिट्री-स्टाइल की सटीकता के साथ की गई थी। पुलिस का मानना है कि रथ की एसयूवी को मध्यमग्राम क्रॉसिंग के पास दोहरिया इलाके में नकली नंबर प्लेट लगी एक कार ने रोका। तभी मोटरसाइकिल पर सवार हमलावर बगल में आ गए और बहुत करीब से गोलीबारी शुरू कर दी।
सूत्रों ने बताया कि इस हमले में इस्तेमाल की गई चांदी जैसे रंग की हैचबैक कार शायद झारखंड से लाई गई थी। एसआईटी अब एक बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क की जांच कर रही है, जिस पर कथित तौर पर रेकी, लॉजिस्टिक्स, छिपने की जगह और शूटरों की आवाजाही में शामिल होने का आरोप है।
अधिकारी ने कहा, "इस हत्या को बहुत ही बारीकी से योजना बनाकर अंजाम दिया गया था। हमलावरों ने अपनी पहचान और अपनी हरकतों को छिपाने के लिए कई कदम उठाए थे। घटनाओं के क्रम को फिर से समझने के लिए हम डिजिटल फुटप्रिंट्स, सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सबूतों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।"
पुलिस ने कोलकाता हवाई अड्डे और बारासात के पास अलग-अलग जगहों से हमले में इस्तेमाल की गई संदिग्ध भागने वाली कार और दो मोटरसाइकिलें बरामद कर ली हैं। कथित तौर पर तीनों वाहनों पर नकली नंबर प्लेट लगी थीं। बाकी आरोपियों का पता लगाने के लिए बंगाल और राज्य के बाहर कई जगहों पर लगातार छापेमारी की जा रही है।
