नई दिल्ली, मनीष कुमार। सिर पर छत कहें या सपनों का आशियाना। घर हमारी बुनियादी जरूरत भी है और सुनहरा ख्वाब भी। और हमारे इस सपने को पूरा करता है हाउसिंग सेक्टर। आजादी के विस्थापित हुए लाखों लोगों को छांव देने से हाउसिंग सेक्टर का सफर शुरू हुआ तो आज देश में बने करोड़ों नए डिजाइन के घर और लाखों ऊंची इमारतें में बने फुल फर्निश्ड फ्लैट इसकी सफलता की कहानी कहते हैं। पर इस सेक्टर का योगदान इतना ही नहीं है। ये ऐसा सेक्टर है जो कृषि के बाद संगठित असंगठित क्षेत्र में सबसे ज्यादा रोजगार प्रदान करता है। हाउसिंग के साथ 270 तरह की इंडस्ट्री जुड़ी हैं। जीडीपी में हाउसिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 8 से 9 फीसदी तक है। तो आइये रियल एस्टेट कंपनियों की संस्था नारेडको के डायरेक्टर जनरल और हाउसिंग सेक्टर के जानकार राजेश गोयल से जानते हैं कि आखिर किस प्रकार ये सेक्टर लोगों के घर के सपने को पूरा कर रहा है और अगले पांच साल में हाउसिंग सेक्टर में क्या होने वाला है।

आने वाले 5 वर्षों में रियल हाउसिंग सेक्टर में होंगे क्या 4 बदलाव

1. कोविड बाद नए सुविधाओं वाले हाउसिंग प्रोजेक्ट्स होंगे लॉन्च

मौजूदा वर्ष से रियल स्टेट सेक्टर में सुधार दिखने लगा है। सात बड़े शहरों में 2021 की दूसरी तिमाही में रेसिडेंशियल घरों के सेल्स में 83 फीसदी की उछाल आई है। वहीं नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग भी बढ़ी है। खासतौर से अफोर्डेबल हाउसिंग के सेगमेंट में। 2021 की पहली छमाही में 61,010 नए रेसिडेंशियल यूनिट की लॉन्चिंग हुई है। माना जा रहा है कि सरकार के प्रोत्साहन, होम लोन पर सस्ता ब्याज दर और कई राज्यों द्वारा स्टॉप ड्यूटी में कटौती करने के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में और सुधार दिखने को मिल सकता है। कोरोना के दूसरी लहर के बाद लॉकडाउन में ढील और वैक्सीनेशन ड्राइव में तेजी के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में तेजी की उम्मीद की जा रही है।

नारेडको के डीजी राजेश गोयल के मुताबिक अगले 20 से 22 सालों में उसने ही घर हमें बनाने हैं जितने अब तक बनाए हैं। नए टाउनशिप बनेंगे नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनेंगे जहां हाउसिंग पर फोकस होगा। हमें लोगों की जरूरत के हिसाब से घर बनाने हैं जो अच्छा हो साथ में अफॉर्डेबल भी। हमारे सामने एक बहुत बड़ा उज्जवल भविष्य है। सरकार ने अच्छी पॉलिसी बनाई है। प्राइवेट सेक्टर इसमें भागीदारी कर रहा। पूरे कोविड-19 के दौरान यही सेक्टर है जिसने खुद को संभाले रखा। हाउसिंग सेक्टर का भविष्य बहुत ही उज्जवल है। हाउसिंग में हम अफोर्डेबिलिटी के साथ सुख सुविधाओं वाले घर का विकल्प हम लोगों को दे पायेंगे।

(फोटो स्रोत-हाउसिंग एंड अर्बन प्लानिंग मंत्रालय फेसबुक पेज)

2. अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा

इस वर्ष एक फरवरी को बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाउसिंग फॉर ऑल और अफोर्डेबल हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिये होम लोन के ब्याज पर अतिरिक्त 1.50 रुपये के छूट का फायदा लेने की मियाद को बढ़ाकर 31 मार्च 2022 कर दिया। पहले ये 31 मार्च 2020 से पहले जिनका होम लोन मंजूर हुआ उन्हें ही फायदा मिल रहा था लेकिन अब जो लोग भी अपना आशियाना खरीद रहे और 31 मार्च 2022 से पहले जिनका होम लोन मंजूर हो जाएगा वे भी योजना का फायदा ले सकते हैं। होम लोन के ब्याज के भुगतान पर 2 लाख रुपये के टैक्स छूट का प्रावधान है। लेकिन इस योजना के तहत जो लोग पहली बार घर खरीद रहे और घर की कीमत 45 लाख रुपये से कम है तो 3.50 लाख रुपये तक ब्याज के भुगतान पर वे लोग टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं। वहीं जिस अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को 31 मार्च 2021 तक मंजूरी मिल गई है उसपर बिल्डर टैक्स छूट हासिल कर सकते हैं। और ये सब इसलिये जिससे रियल एस्टेट सेक्टर पटरी पर लौट सके और हाउसिंग क्षेत्र में तेजी आये। जिसका फायदा अर्थव्यवस्था को तो होगा ही साथ ही रोजगार का सृजन भी हो सकेगा।

3. रेंटल हाउसिंग पर रहेगा फोकस

देश के बड़ा शहरों में कई लोग रोजगार के लिये बड़े शहरों में आते हैं। उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत आती है किराये पर मिलने वाली घर की। लेकिन इस वर्ष बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने रेंटल हाउसिंग स्कीम की घोषणा की जिसके बाद अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के कंस्ट्रक्शन में जबरदस्त इजाफा होगा। जिससे किराये पर लोगों को रहने के लिये सस्ता घर उपलब्ध हो सकेगा। राजेश गोयल के मुताबिक रेंटल हाउसिंग एक बहुत बड़ा ऑप्शन सामने आया है। दुनिया भर के देशों में यह पहले से मौजूद है। हमारे यहां ऐसे नियम थे जिसमें घर दिया तो खाली होगा या नहीं जैसे मुद्दे थे। हमारे पास एक करोड़ घर खाली पड़े हैं लेकिन हम किराए पर नहीं दे सकते लेकिन सरकार द्वारा उस दिशा में काफी कुछ किया जा रहा है।

(फोटो स्रोत-हाउसिंग एंड अर्बन प्लानिंग मंत्रालय फेसबुक पेज)

4. 2022 तक सबके लिये घर

आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर 2022 तक 'सबके लिए घर' के लक्ष्य को हासिल के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) को 2016 में लॉन्च किया था। केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास मंत्रालय को प्रोजेक्ट लागू करने वाले सहयोगी के तौर पर अधिकृत किया। प्रोजेक्ट को दो चरणों में लागू किया गया। इसके तहत योजना के पहले चरण में यानी 2016-17 से 2018-19 तक 92% लक्ष्य हासिल किया गया है। सरकार को भरोसा है कि स्थायी प्रतीक्षा सूची (पीडब्ल्यूएल) में शामिल सभी घर अमृत महोत्सव के अंत तक पूरे हो जाएंगे। मौजूदा स्थायी प्रतीक्षा सूची (पीडब्ल्यूएल) के हिसाब से अब तक 2.14 करोड़ लाभार्थी पात्र पाए गए हैं। इसे देखते हुए 1.92 करोड़ (90%) मकानों को मंजूरी दी गयी है और मंजूरी पाने वाले मकानों में से 1.36 करोड़ (71%) आवास पूर्ण हो चुके हैं। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना – अर्बन के तहत स्वीकृत घरों की कुल संख्या 1.13 करोड़ है, जिसमें से 85.65 लाख घरों का निर्माण हो रहा है और 51 लाख से अधिक घरों का निर्माण पूरा हो चुका है और लाभार्थियों को दे दिया गया है।

1.82 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता के साथ PMAY-U के तहत कुल निवेश 7.39 लाख करोड़ रुपये है। मिशन के तहत अब तक 1,06,390 करोड़ रुपये की राशि जारी की जा चुकी है।

राजेश गोयल कहते हैं अगले 25 साल में इतने ही घर और बनाने है जितने अब तक बनाए हैं। देश की आबादी बढ़ती जा रही है शहरीकरण बढ़ता जा रहा है। जितने शहर आज हैं उतने ही और बनाने होंगे। सरकार बहुत कुछ सोच रही है निजी क्षेत्र भी इस दिशा में काम करना है अगर यह हम आज कहे कि हम सब को छत देने के हालात में हैं या दे पा रहे हैं तो यह गलत होगा। पर उस दिशा में प्रयास जारी है। हाउसिंग बहुत बड़ा फोकस है। रोटी कपड़ा मकान की हम बात करते हैं रोटी कपड़ा तो हमने दिला दिया लेकिन मकान अभी भी बहुतों के पहुंच से दूर है।

(फोटो स्रोत-हाउसिंग एंड अर्बन प्लानिंग मंत्रालय फेसबुक पेज)

पिछले सात दशकों में रियल एस्टेट सेक्टर के बड़े पड़ाव

1. 1975-80 तक योजनाओं के अंतर्गत घर सरकार ही बनाती थी

जब देश आजाद हुआ तो बंटवारे के बाद लाखों लोग बेघर हो गये थे। तबके सरकार के सामने चुनौती थी इन लोगों के लिये कैसे आशियाने उपलब्ध कराया जाये।

राजेश गोयल के मुताबिक बंटवारे से पैदा हुए हालात और अन्य समस्याओं को सुलझाने में ही सरकार लगी थी। तब भविष्य के बारे में नहीं सोचा गया। हाउसिंग सेक्टर में बहुत एक्टिव प्लेयर्स भी नहीं थे। 1975-80 तक बड़ी योजनाओं के तहत घर सरकार ही बनाती थी। थोड़े बहुत बिल्डर तब हुआ करते थे जिसमें डीएलएफ शामिल है। लेकिन अब सरकार फैसिलिटेटर की भूमिका में है। तब से लेकर अबतक नीतियों में बहुत परिवर्तन आया है।

2. रखी गई प्लान्ड सिटी की नींव

देश के पहले नियोजित शहरों में एक चंडीगढ़ है जो अपने बेहतर प्लानिंग और वास्तुकला लेआउट के लिए जाना जाता था। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के इस ड्रीम सिटी को आर्किटेक्ट ले कॉर्बूसियर द्वारा डिजाइन किया गया। इसकी आधारशिला 1952 में रखी गई। ये शहर न केवल इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए बल्कि दुनिया भर में एक मिसाल के तौर पर देखा जाता रहा है।

(फोटो स्रोत-हाउसिंग एंड अर्बन प्लानिंग मंत्रालय फेसबुक पेज)

3. 1970 में हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कंपनी की स्थापना

रियल एस्टेट सेक्टर हाउसिंग को बढ़ावा देने के लिये महाराष्ट्र सरकार ने महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग एक्ट पारित किया गया। ये पहला मौका था जब किसी राज्य कोई रियल एस्टेट कानून बनाया हो। जिसका बाद में कई राज्यों ने अनुसरण किया। बाद में केंद्र सरकार ने भी आवास को मूलभूत आवश्यकता माना फिर हाउसिंग सेक्टर को प्रोत्साहित करने के लिये 1970 में हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कंपनी ( HUDCO) बनी। फिर सेक्टर को धन मुहैया कराने के लिये 1988 में नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) का गठन किया।

4. 90 के दशक में आया बूम

1991 में जब आर्थिक सुधार सुधार लागू हुआ तो रियल एस्टेट सेक्टर के भी पंख लगने लगे। आर्थिक सुधार के चलते अर्थव्यवस्था बड़ी होती चली गई, बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिये रेड कार्पेट बिछा दिये गये, निजीकरण का दौर शुरू हुआ, निजी निवेश बढ़ने लगा जिससे बड़े शहरों में लोगों के लिये रोजगार के अवसर बढ़े। जिसके चलते देश में नए मध्यम वर्ग का जन्म हुआ। इन बड़े शहरों में मध्यम वर्ग के लिये घरों की जरूरत महसूस की जाने लगी तो रियल एस्टेट सेक्टर का जबरदस्त ग्रोथ हुआ। आईटी सेक्टर और सर्विसेज इंडस्ट्री के चलते बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, मुंबई, चेन्नई, गुड़गांव, नोएडा जैसे शहर में हाउसिंग की डिमांड बढ़ी तो इन शहरों में गगनचुंबी इमारतें नजर आने लगी। देश में मॉल कल्चर डेवलप हुआ। चेन्नई में स्पेंसर प्लाजा और नई दिल्ली में खेल गांव रोड पर अंसल प्लाजा पहला मॉल बना।

राजेश गोयल बताते हैं कि मिडिल क्लास को घर उपलब्ध कराने की दिशा में निजी क्षेत्र और सरकारों ने काफी कुछ किया। तो बैंकों ने होम लोन उपलब्ध कराया तो वित्त मंत्रालय ने घर खरीदने पर टैक्स छूट दी। अफॉर्डेबिलिटी पर जोड़ दिया गया, 90 के दशक के बाद लोगों की इनकम भी बढ़ी तो दूसरी तरफ कंपनियों की ओर से घरों की सप्लाई बढ़ाई गई और सरकार ने नीतियां भी खरीदारों के पक्ष में तैयार किया इन सब ने मिडिल क्लास के लिए घर खरीदने का एक अच्छा माहौल तैयार किया जो आज की तारीख में भी हाउसिंग सेक्टर के लिये रीढ़ की हड्डी साबित हो रहा। आज भी जो हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च हो रहे हैं वह अफॉर्डेबल सेगमेंट में ही लॉन्च किये जा रहे। हमारी कोशिश है कि घर जो बनायें वो सबके पहुंच में हो और अफॉर्डेबल हो।

(फोटो स्रोत-हाउसिंग एंड अर्बन प्लानिंग मंत्रालय फेसबुक पेज)

5. 2000 के बाद का दौर

हाल के साल में रियल एस्टेट सेक्टर में बिल्डरों के धोखाधड़ी ने जहां घर खरीदारों को परेशान किया तो बैंकों के पैसे डूब गये। बिल्डरों के चलते सालों तक हाउसिंग प्रोजेक्ट अधर में लटक गया। जिसके बाद सरकार ने घर खरीदारों को राहत देने के लिये रियल एस्टेट सेक्टर को रेग्युलेट करने का फैसला किया। रियल एस्टेट रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट तैयार किया। जिससे बिल्डर की मनमानी पर नकेल कसी जा सके। 

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