आगरा [जासं]। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के बाद देश के दूसरे सबसे प्रतिष्ठित बोर्ड काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआइएससीई) में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। बच्चों के बस्ते को 30 फीसद तक हल्का किया जा रहा है। होमवर्क की छुट्टी होने जा रही है। बच्चों को स्कूल में ही अपना कार्य खत्म करना होगा।

शुक्रवार से एसोसिएशन ऑफ इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट यूपी शाखा की दो दिवसीय वार्षिक कान्फ्रेंस होटल क्लार्कशिराज में शुरू हुई। लर्निग इन ए चैलेंजिंग व‌र्ल्ड पर मंथन के लिए देशभर के बोर्ड से जुड़े स्कूलों के प्रमुख प्रधानाचार्य भाग ले रहे हैं। कान्फ्रेंस में बातचीत में सीआइएससीई के चेयरमैन फादर डॉ. जोस ए ने कहा कि शिक्षा में टेक्नोलॉजी के प्रयोग से इसकी गुणवत्ता में सुधार आएगा। इसके लिए कोलकाता में रिसर्च एंड डेवलपमेंट विंग का गठन किया जा रहा है। इसमें शिक्षा की क्वालिटी को बढ़ावा देने पर शोध कार्य होगा। बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ प्रयोगात्मक होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि खेलकूद प्रमाण पत्रों को देश के सभी राज्यों में मान्यता के लिए स्पो‌र्ट्स मेंटर संस्था के साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव तैयार हुआ है। इसमें केंद्र सरकार की मदद ली जा रही है। बोर्ड के अध्यक्ष सुधीर जोशी ने बताया कि बोर्ड से जुड़े स्कूलों से होमवर्क खत्म किया जा रहा है। इसका ड्राफ्ट बनकर तैयार हो गया है। कक्षा 6 से 12 तक के पाठ्यक्रम को और भी रुचिकर बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट टेस्ट शुरू किए जा रहे हैं। नवंबर के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में होने जा रही बोर्ड की बैठक में इस पर मुहर लगेगी।

ये बदले मान्यता के नियम :

हाईस्कूल तक की मान्यता के नियमों में बोर्ड ने बदलाव किया है। नए नियम के तहत शहरी क्षेत्र में आधा एकड़ [पहले 1 थी] और ग्रामीण में एक एकड़ [पहले 2 थी] जमीन पर खुलने वाले स्कूलों को मान्यता दे दी जाएगी।

नए विषय शुरू होंगे

-बोर्ड जल्द नए विषय शुरू करने जा रहा है, जिसमें भारतीय संस्कृति और सभ्यता को शामिल किया गया है।

-बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित हों। इसके लिए नैतिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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