नई दुनिया, भोपाल। हिंदी भारत की राजभाषा है, लेकिन अब इसे राष्ट्रभाषा बना देना चाहिए। वह इसलिए, क्योंकि हिंदी देश के कोने-कोने में स्वीकार्य भाषा है। आज तक उसे यह दर्जा प्राप्त नहीं हो सका है तो यह हमारे नेतृत्व की कमी रही है। राजनीतिक लाभ-हानि का विचार करने के कारण हम इसका फैसला नहीं कर सके। यह बात केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को भोपाल में आयोजित 10वें विश्व हिंदी सम्मेलन के समापन अवसर पर कही। वह समारोह में मुख्य अतिथि के रू प में शिरकत कर रहे थे।

सम्मेलन में समापन भाषण देते हुए सिंह ने कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का समर्थन सिर्फ हम नहीं कर रहे हैं, बल्कि लोकमान्य बालगंगाधर तिलक, गोपाल स्वामी आयंगर जैसे महापुरुषों ने भी किया है, जो गैर हिंदी भाषाई थे। उन्होंने कहा कि दुनिया के हर देश ने सबसे पहले भाषाई समस्या का समाधान किया। लेकिन भारत आजादी हासिल होते ही हिंदी को जो दर्जा दिया जाना चाहिए था वो नहीं दिला सका।

सिंह ने कहा कि मैं मानता हूं कि भारत को विश्व योग दिवस के लिए जब 177 देशों का समर्थन प्राप्त हो सकता है तो फिर हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनाने के लिए 127 देशों का समर्थन क्यों नहीं प्राप्त हो सकता। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के बाद सर्वाधिक बोलने और समझने वाली यदि कोई भाषा है तो वो हिंदी है। बाजार के कारण ही तकनीकी कंपनियां भी आज हिंदी को बढ़ावा देने की बात कर रही हैं। सम्मेलन के समापन पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रशासन में हिंदी सत्र से प्राप्त हुई सभी अनुशंसाओं को मध्य प्रदेश में लागू करने की घोषणा की।

अनुशंसाओं को लागू कराने के लिए होगा विशेष समीक्षा समिति का गठन

सम्मेलन में पारित दो प्रस्ताव की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री जनरल डॉ. वीके सिंह ने बताया कि सभी 12 विषयों पर प्राप्त अनुशंसाओं को लागू करवाने के लिए एक विशेष समीक्षा समिति का गठन किया जाएगा। समिति विचार-विमर्श के बाद अनुशंसाएं आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेजेगी। 11वां विश्व हिंदी सम्मेलन 2018 में मॉरिशस में किया जाएगा। साथ ही विश्व हिंदी सचिवालय के नए भवन का उद्घाटन भी उसी दौरान होगा।

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'भारत को विश्व योग दिवस के लिए जब 177 देशों का समर्थन मिल सकता है तो हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनाने के लिए 127 देशों का समर्थन क्यों नहीं मिल सकता।' -राजनाथ सिंह

Edited By: Murari sharan