भोपाल, जेएनएन। मध्य प्रदेश में मूसलाधार बारिश और बाढ़ के बाद जिंदगी ठहर गई है। जोरदार बारिश ने 11 लोगों की जान ले ली है। प्रदेश की सभी प्रमुख नदियां उफान पर हैं। उधर, हरदा की जिला जेल में सुकनी नदी का पानी भर गया। ऐसे में चार महिलाओं सहित 229 कैदियों को जेल परिसर में ही सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। मौसम विभाग ने प्रदेश के आठ जिलों में रेड, आठ जिलों में ऑरेंज और 17 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है।

राजधानी भोपाल में भारी बारिश लोगों के लिए मुसीबत बनकर आई है। शहर के कई निचले इलाके पानी में डूब गए हैं। वहीं, 2016 के बाद पहली बार कोलार डैम के गेट खोलने पड़े हैं। इस बीच मौसम विभाग की मानें तो अगले दो दिन सूबे के लोगों पर भारी पड़ सकते हैं। 

सीहोर जिले में जताखेड़ा के पास पुलिया से टकराने के बाद एक कार उफनते नाले में गिर गई। हादसे में कार में सवार एक महिला सहित पांच लोग नाले में बह गए। खलघाट-धरमपुरी मार्ग पर पिपल्दागढ़ी गांव के पास बारिश के कारण पेड़ से बस टकरा गई। हादसे में पीछे बैठे तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। केंद्रीय जेल सागर में बारिश की फिसलन से गिरने के कारण आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी की मौत हो गई। सागर जिले के गढ़ाकोटा में 12 वर्षीय राहुल साइकिल सहित नाले में बह गया। सिवनी जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर पुसेरा मुंगवानी गांव के बीच वैनगंगा नदी के अथाह पानी में रविवार देर रात दो युवक कार समेत बह गए। दोनों के शव बरामद किए गए।

बारिश के चलते समूचे प्रदेश का हाल बेहाल

- हरदा में सुकनी नदी की आई बाढ़ के कारण करीब 200 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।

- बालाघाट जिले में भीमगढ़ बांध से पानी छोड़े जाने से वैनगंगा नदी उफान पर है। कई बस्तियां पूरी तरह डूबीं।

- उज्जैन में शिप्रा किनारे के घाट और मंदिर भी पानी में डूब गए हैं।

- इंदौर-इच्छापुर मार्ग स्थित मोरटक्का पुल से रविवार रात 12 बजे से यातायात प्रतिबंधित कर दिया है।

- रतलाम में दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग पर तलावली-चौमहला के बीच पटरियां डूब गईं। तीन घंटे रेल यातायात बाधित रहा।

- सीहोर जिले में नर्मदा किनारे बसे 26 गांवों में बाढ़ का खतरा। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा।

- राजगढ़ में पांच बांधों के 25 गेट खोलने से निचली बस्तियों में पानी भरा।

- नरसिंहपुर जिले में बरगी गेट खुलने और लगातार बारिश से नर्मदा और उसकी सहायक नदियों में बाढ़ की स्थिति है।

70 करोड़ की फसल को पहुंचा नुकसान

प्रदेश में साढ़े तीन हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबे की खरीफ फसल अतिवर्षा की भेंट चढ़ चुकी है। 17 जिलों में जलभराव वाले खेतों की सोयाबीन, मूंग, उड़द और सब्जी की फसलें बर्बादी की कगार पर हैं। इससे किसानों को लगभग 70 करोड़ रुपये मूल्य की फसल के नुकसान का प्रारंभिक अनुमान है। 32 जिलों में करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है।

सरकार करेगी नुकसान की भरपाई

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि बारिश से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई सरकार करेगी। इसके लिए कृषि और राजस्व विभाग को सर्वे करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। सहकारी बैंकों से कहा गया है कि वह किसानों को जरूरी ऋण मुहैया कराएं।

Posted By: Sanjeev Tiwari

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