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'वह मेरे साथ हाथापाई करना चाहते थे', 'गद्दार दोस्त' वाली टिप्पणी पर बिट्टू ने राहुल पर लगाया गंभीर आरोप

Published: Wed, 04 Feb 2026 03:12 PM (IST)

संसद परिसर में राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच तीखी बहस हुई। राहुल ने बिट्टू को ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संसद परिसर में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच जमकर कहा-सुनी हुई। राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को 'गद्दार दोस्त' कहा तो भाजपा सांसद ने भी उन्हें जवाब देते हुए 'देश के दुश्मन' कह दिया। इस पूरे मामले पर बिट्टू की प्रतिक्रिया दी है।

केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, "जब तक मैं आपके साथ (कांग्रेस पार्टी में) था, तब तक मैं आपके लिए अच्छा था... अब, जब मैं बीजेपी में आ गया हूं तो आप मुझे नापसंद करने लगे हैं। लेकिन आप मेरे लिए ऐसा कैसे कह सकते हैं? आप यह कैसे कह सकते हैं कि मैं आपके पास वापस आऊंगा?"

'हाथ मिलाए मेरी जूती'

भाजपा सांसद ने कहा, "जब मैंने उन्हें जवाब दिया... अगर आप वीडियो देखेंगे तो वह मेरे साथ हाथापाई करना चाहते थे। वेणुगोपाल ने उन्हें रोका। सुखजिंदर सिंह रंधावा ने उन्हें रोका... मेरे सिर पर गुरु की पगड़ी है। मैं पंजाब से हूं। मैं आपके सामने कैसे झुक सकता हूं?... हाथ मिलाता है मेरी जूती। उन्होंने मेरे पीछे आने की कोशिश की लेकिन उसके सांसदों ने उसे रोक दिया। आप यह वीडियो में देख सकते हैं।"

बिट्टू ने आगे कहा, "जब मैं अंदर जा रहा था तो उन्होंने हाउस के अंदर भी वही किया। स्पीकर ने उन्हें बाहर भेज दिया। मैं आगे की कार्रवाई के बारे में बात कर रहा हूं। उन्होंने बाहर भी 'सड़क के गुंडे' जैसा बर्ताव किया। गांधी परिवार ने हमेशा सिखों और पगड़ी वालों को निशाना बनाया है। किसी और सांसद ने कुछ नहीं कहा। सभी सस्पेंड सांसद वहीं बैठे थे।"

'तुम सिखों के कातिल हो'

रवनीत ने कहा, "हम सब रोज मिलने वाले साथी हैं। राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि उन्हें क्या हो गया है, उनके अंदर क्या पर्सनल गुस्सा है। उन्होंने मुझसे कहा, तुम फिर मेरे पास आओगे। उन्होंने मुझसे हाथ मिलाने की कोशिश की। मैंने कहा, तुम इस देश के सबसे बड़े गद्दार हो, सिखों के कातिल हो। उनके गुंडों ने इस देश में हजारों सिखों को मारा। उन्होंने हमारे सबसे पवित्र गुरुद्वारे में तोड़फोड़ की... जब कार्यकर्ता राजीव गांधी के लिए 'शहीद' के नारे लगाते थे तो वे सरदार बेअंत सिंह को भी 'शहीद-ए-आजम' कहते थे।"

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