सुपर अल नीनो का दिखेगा खौफनाक असर, भारत समेत दुनिया भर में पड़ेगी जानलेवा गर्मी; 4.51 लाख मौतों की आशंका
शिकागो विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, सुपर अल नीनो के कारण अगले छह महीनों में दुनिया भर में 4.51 ...और पढ़ें
-1790434275282_m.webp)
सुपर अल नीनो का दिखेगा कहर (यह तस्वीर AI द्वारा जनरेट की गई है।)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शिकागो विश्वविद्यालय के एनर्जी पालिसी इंस्टीट्यूट की सुपर अल नीनो पर आधारित एक रिपोर्ट ने आने वाले महीनों में गर्मी से होने वाली मौतों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
अध्ययन के मुताबिक, सामान्य वर्षों की तुलना में सुपर अल नीनो के कारण अगले छह महीनों में दुनिया भर में करीब 4.51 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। इनमें भारत में गर्मी संबंधी कारणों से करीब 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है।
बुधवार को जारी अध्ययन के सह-लेखक एमिली ग्रोवर कोपेक के अनुसार, यह अनुमान मौसमी तापमान पूर्वानुमान और तापमान तथा मृत्यु दर के बीच संबंध के विश्लेषण पर आधारित है। इसके लिए यूरोपीय सेंटर फार मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट के प्रमुख मौसमी पूर्वानुमानों में से एक का इस्तेमाल किया गया है।
सामान्य से 1.2 डिग्री तक ज्यादा तापमानरिपोर्ट के अनुसार, सुपर अल नीनो के प्रभाव से आने वाले महीनों में वैश्विक स्तर पर सतह का तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है। अनुमान है कि अगले 20 वर्षों तक ऐसा ही तापमान देखने को मिलेगा।
अध्ययन में इस तरह के तापमान के प्रभाव को अगले छह महीनों में होने वाली अतिरिक्त मौतों के अनुमान से जोड़ा गया है।कोपेक ने बताया कि इससे पहले भी जलवायु माडल के आधार पर भविष्य में होने वाली मौतों का अनुमान लगाने के लिए इसी तरह के तरीके का इस्तेमाल किया गया है।
हालांकि, इस अध्ययन में उस पद्धति को कम अवधि के मौसमी पूर्वानुमानों के साथ अलग तरीके से इस्तेमाल किया गया है।
मौजूदा आंकड़ों को बनाया आधारअध्ययन के लिए 1996 से 2025 के आंकड़ों को आधार बनाने के सवाल पर कोपेक ने कहा कि इसका उद्देश्य अनुमानों को मौजूदा परिस्थितियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया के लिहाज से प्रासंगिक रखना था।
उन्होंने कहा कि ऐसे पूर्वानुमानों का मकसद यह समझने में मदद करना है कि संसाधनों का इस्तेमाल कहां किया जाए और लोगों की जान बचाने के लिए समय रहते कब कदम उठाए जाएं।भारत में प्राकृतिक संसाधन रक्षा परिषद की जलवायु लचीलापन और स्वास्थ्य टीम के प्रमुख अभियांत तिवारी ने इसे समय रहते चेतावनी देने वाला उपयोगी साधन बताया।
उन्होंने कहा कि इससे हीट एक्शन प्लान और मजबूत संस्थागत व्यवस्था के जरिए तैयारी बढ़ाने तथा कमजोर समुदायों की सुरक्षा पर जोर मिलता है।एम्स के फैकल्टी सदस्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हर्षल रमेश साल्वे ने भी सभी स्तरों पर हीट एक्शन प्लान लागू करने जैसी रोकथाम की रणनीतियों पर तेजी से काम करने की जरूरत बताई।
उनके अनुसार, बुजुर्गों, पहले से बीमार लोगों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और खुले में काम करने वाले कामगारों जैसे सबसे कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देना जरूरी है। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
यह भी पढ़ें- अल नीनो से कितना अलग है सुपर अल नीनो? 2027 तक हो सकती हैं लाखों मौतें
