नई दिल्ली, प्रेट्र। विश्व में वायु प्रदूषण फैलाने वाले कारकों में इमारतों का निर्माण और उनके संचालन के दौरान की गतिविधियों की 38 प्रतिशत हिस्सेदारी है। व‌र्ल्ड इकोनोमिक फोरम में प्रस्तुत अध्ययन रिपोर्ट के निष्कर्ष से लोग हैरान रह गए हैं। अब शहरों में बनने वाली इमारतों और उनमें होने वाली गतिविधियों को नियंत्रित करने की मांग उठ रही है। इस नियंत्रण से ही धरती के तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस से नीचे लाया जा सकेगा। तापमान को कम करने की यह सीमा पेरिस समझौते में तय की गई है।

विश्व के प्रमुख शहरों से जानकारी एकत्रित की गई

यह अध्ययन रिपोर्ट एसेंचर नाम की संस्था ने तैयार की है। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से होने वाले वायु प्रदूषण के आंकड़े एकत्रित किए गए हैं। इसमें विश्व के प्रमुख शहरों से जानकारी एकत्रित की गई है। रिपोर्ट में प्रमुख प्रदूषण कारकों से होने वाले उत्सर्जन को रोकने वाली तकनीक विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए आवश्यक शोध में अविलंब निवेश करने की आवश्यकता जताई गई है। निर्माण से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता पैदा करने की भी आवश्यकता जताई गई है।

70 प्रतिशत प्रदूषण शहरों से

फोरम ने कहा है कि विश्व की आधी से ज्यादा आबादी शहरों में रहती है और वहीं से 70 प्रतिशत वायु प्रदूषण पैदा होता है। यही प्रदूषण पर्यावरण को बर्बाद कर रहा है। इसलिए पर्यावरण सुधार की मुहिम में शहरों को अहम भूमिका अदा करनी होगी। इमारतों के मालिकों और उनमें रहने वालों को पर्यावरण सुरक्षा की अपनी जिम्मेदारी से वाकिफ होना पड़ेगा। उन्हें अपनी गतिविधियों में सुधार के साथ ही हानिकारक गैसों का उत्सर्जन रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने होंगे। इसके लिए नेट जीरो कार्बन सिटी विकसित करनी होंगी। ये हमारे रहन-सहन में भी उच्च गुणवत्ता स्थापित करेंगी।

अध्ययन में यह भी कहा गया

अध्ययन रिपोर्ट में बेल्जियम की कंस्ट्रक्शन कंपनी एक्टेंसा के ब्रसेल्स के रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण वाले प्रोजेक्ट का जिक्र किया गया है। बताया गया है कि कंपनी ने सोलर और जियोथर्मल तकनीक का इस्तेमाल कर निर्माण के दौरान प्रदूषण को रोकने का इंतजाम किया है। इसी तरह से इटली के तूरिन शहर का भी उदाहरण दिया गया है, जहां के स्थानीय निकाय ने प्रदूषण मुक्त बिजली की आपूर्ति करने वाली कंपनी एनल एक्स के साथ समझौता किया है और वह कंपनी शहर की इमारतों में बिजली की आपूर्ति कर रही है।

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan