ज्ञानेश कुमार विवाद पर अब सरकार के अंदर से ही उठने लगे सवाल, कुमारस्वामी ने SIR पर मांगा जवाब
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने चुनाव आयोग से वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) विवाद पर सफाई मांगी है।

एचडी कुमारस्वामी ने चुनाव आयोग से SIR विवाद पर सफाई देने को कहा
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष हमलावर है और लगातार चुनाव आयोग के लिए फैसलों पर सवाल उठा रहा है। चुनाव आयोग को लेकर अब केवल विपक्ष की नहीं, बल्कि सरकार के लोग भी सवाल कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने आज शनिवार, 26 सितंबर को चुनाव आयोग से वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर चल रहे विवाद पर सफाई देने को कहा है।
एचडी कुमारस्वामी ने कहा- चुनाव आयोग दे सफाई
एचडी कुमारस्वामी ने चुनाव आयोग पर उठ रहे सवालों पर कहा, 'यह किसी पार्टी या नेता की मांग का सवाल नहीं है। चुनाव आयोग की जिम्मेदारी अहम है। जमीनी हकीकत क्या है? चुनाव आयोग के अंदर क्या चल रहा है?'
कुमारस्वामी ने आगे कहा, 'मीडिया में हम जो देख रहे हैं और असल हकीकत क्या है, इसके बीच का अंतर इन सदस्यों को बताना होगा। क्योंकि यह एक अहम संस्था है, एक स्वायत्त निकाय है, ऐसा क्यों हुआ? यह हकीकत उन्हें मीडिया और देश को बतानी चाहिए। उनकी जिम्मेदारी ज्यादा है। यह कोई आसान बात नहीं है।'
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, 'चुनाव आयोग के उन तीन सदस्यों, जिनमें चेयरमैन भी शामिल हैं, के बीच क्या समस्या है? इसमें क्या गड़बड़ है? अगर कोई बात है, तो उन्हें साफ-साफ बताना चाहिए।'
एचडी कुमारस्वामी से पहले NDA के कई और सहयोगी चुनाव आयोग से सफाई देने की मांग कर चुके हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता चिराग पासवान, राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा और तेलुगु देशम पार्टी से चंद्रबाबू नायडू ने भी विवाद को सुलझाने के लिए चुनाव आयोग से सफाई की मांग की थी।
चुनाव आयोग को लेकर खड़ा हुआ विवाद
चुनाव आयोग को लेकर मामले की शुरुआत तब हुई, जब अंग्रेजी अखबार 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने रिपोर्ट दी कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों के दौरान 14 बार लिखित रूप में असहमति या आपत्ति जताई थी।
अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग की है।
ECI का कहना है कि अलग-अलग राय, आंतरिक नोट और सवाल-जवाब उसके कामकाज का हिस्सा हैं और SIR पर उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
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