नई दिल्ली। राष्ट्रीय महिला आयोग ने गुवाहाटी में पिछले हफ्ते हुए शर्मनाक वाकये के लिए स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। बीते सोमवार गुवाहाटी में रात साढ़े आठ बजे के आस-पास एक लड़की को दो दर्जन से अधिक युवकों ने करीब पौने घंटे तक सरे राह प्रताड़ित किया था। इस घटना का वीडियो भी बना। उक्त मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। महिला आयोग ने सोमवार को अपनी जांच पूरी होने के बाद कहा कि इस पूरे प्रकरण में स्थानीय पुलिस की लापरवाही बड़ा कारण बनी। सूचना मिलने के आधे घंटे बाद पुलिस मौके पर पहुंची। उसने इस घटना की गंभीरता को समझने में कोताही की और मामले में गंभीर रुख नहीं रखा। आयोग ने कहा कि पुलिस और प्रशासन के बीच इस मामले में बेहतर तालमेल की कमी रही।

आयोग ने दो सदस्यीय जांच समिति को यह काम सौंपा था। समिति की सदस्य वानसुक सिएम और अल्का लाम्बा ने शनिवार को पीड़िता से मुलाकात की थी। आयोग ने राज्य सरकार को भी आड़े हाथों लिया। कहा कि घटना के एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी पीड़िता के रिहैबिलिटेशन के लिए कुछ नहीं किया गया।

बता दें कि जब लड़की दो भीड़ पीट रही थी और उसके कपड़े फाड़ कर उसे सरे राह अपमानित कर रही थी, तब पूरी घटना को रिपोर्टर कैमरे में कैद कर रहा था। जहां यह सब हो रहा था, वहां से पुलिस स्टेशन महज पाच-दस मिनट की दूरी पर है, लेकिन पुलिस को आने में आधा घंटा लग गया। आरोप लगा था कि घटना में एक स्थानीय चैनल का रिपोर्टर भी शामिल था। उक्त रिपोर्टर को चैनल ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वहीं संबंधित थाने के एसआई को भी सस्पेंड कर दिया गया है। आयोग ने कहा कि उक्त रिपोर्टर की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिसकी बारीकी से जांच की जानी चाहिए।

छेड़छाड़ करने वालों में 11 को पुलिस ने चिन्हित किया था, जिनमें से 4 आरोपी अब भी फरार हैं, जबकि मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने सभी आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस को 48 घटे की जो समयसीमा दी थी, वह अब समाप्त हो चुकी है।

इस बीच, इंदौर के एक व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करते हुए पीड़िता को 27 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा है कि राज्य सरकार को बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए।

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