राजेश वर्मा, उज्जैन। मध्य प्रदेश स्थित भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली उज्जैन पांच हजार सालों से गुरु-शिष्य परंपरा का पोषण कर रही है। नगर की 40 से अधिक वेद पाठशालाओं में विद्यार्थी गुरुकुल परंपरा से वेद, व्याकरण, संस्कृत व साहित्य का अध्ययन कर रहे हैं। यहां महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान का मुख्यालय है, वहीं महाकाल मंदिर प्रबंध समिति ने महाकालेश्वर वैदिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के रूप में वेद अध्ययन का प्रमुख केंद्र स्थापित किया है।

आज भी जीवंत है कृष्ण काल

गुरुुकुल पाठशालाओं में आज भी मानो भगवान कृष्ण का कालखंड जीवंत है। उस समय की तरह ही वर्तमान में भी अधिकांश पाठशालाएं आश्रमों में संचालित हो रही हैं। इनमें बटुक समस्त कार्य स्वयं करते हैं। वेशभूषा भी ब्राह्मणों की तरह होती है। सिर पर शिखा (चोटी) रखना अनिवार्य है। सुबह पांच बजे जागरण के बाद नित्यकर्म और फिर प्रात: वंदन होता है। इसके बाद योग, व्यायाम करना अनिवार्य है।

अल्पाहार के बाद कक्षाएं शुरू हो जाती

अल्पाहार के बाद कक्षाएं शुरू हो जाती हैं। दोपहर में भोजन के बाद आश्रम सेवा होती है। इसमें गायों की देखभाल, बागवानी, आश्रम व अपने कक्ष की सफाई करना शामिल हैं। शाम को खेलकूद व व्यायाम के बाद संध्या वंदन होता है। रात्रि विश्राम से पूर्व स्वाध्याय व मनोरंजन के लिए नैतिक शिक्षा पर आधारित वाद-विवाद, कहानी आदि सुनाना दिनचर्या का हिस्सा है। रात्रि 10 बजे समस्त विद्यार्थी गुरु सेवा कर शयन के लिए जाते हैं।

निशुल्क है वेद अध्ययन

आधुनिक शिक्षा पद्धति में जहां अभिभावकों को स्कूल, कॉलेज में फीस के रूप में मोटी रकम देनी पड़ती है, वहीं गुरुकुल पाठशालाओं में वेद अध्ययन निशुल्क कराया जाता है। महर्षि सांदीपनि राष्ट्रीय वेद विद्या प्रतिष्ठान द्वारा विद्यार्थियों को वेद पढ़ाने के लिए पाठशाला संचालकों को अनुदान दिया जाता है। वहीं महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान में विद्यार्थियों के अध्ययन का खर्च मंदिर समिति उठाती है। नगर की 40 से अधिक वेदपाठशाओं में करीब 1150 बटुक निशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं।

भगवान श्रीकृष्ण ने 64 दिन में प्राप्त की थी शिक्षा

उज्जैन में विद्या अध्ययन करने आए भगवान श्रीकृष्ण ने गुरुश्रेष्ठ सांदीपनि से 64 दिन में वेद, वेदांग, उपनिषद् तथा गीता का ज्ञान प्राप्त किया था। सांदीपनि आश्रम के पुजारी पं. रूपम व्यास ने बताया श्रीकृष्ण ने चार दिन में चार वेद, छह दिन में छह शास्त्र, सोलह दिन में 16 कलाएं, अठारह दिन में 18 पुराण का ज्ञान प्राप्त किया था।

उज्जैन में गुरुकुल शिक्षा परंपरा आज भी जीवंत

उज्जैन में गुरुकुल शिक्षा परंपरा आज भी जीवंत है। महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान पूर्णत: निशुल्क आवासीय विद्यालय है। इसमें बिना कोई शुल्क लिए विद्यार्थियों को वेद, व्याकरण व साहित्य का अध्ययन कराया जाता है -डॉ. पीयूष त्रिपाठी, निदेशक, महाकालेश्वर वैदिक शोध संस्थान, उज्जैन, मप्र।

Edited By: Bhupendra Singh