नई दिल्ली, जेएनएन। सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह के 353 वीं जयंती पर राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और पीएम मोदी समेत अन्य कई लोगो ने शुभकामनाएं दी। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ट्वीट कर के कहा, 'गुरु गोविंद सिंह जी को उनकी जयन्‍ती पर मेरी श्रद्धांजलि। उनका जीवन लोगों की सेवा और सत्‍य, न्‍याय एवं करुणा के जीवन-मूल्यों के प्रति समर्पित रहा। गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन और शिक्षाएं हमें आज भी प्रेरित करती हैं।' 

पीएम मोदी ने ट्वीट करके कहा, 'हम आदरणीय श्री गुरु गोविंद सिंह जी को उनके प्रकाश पर्व पर नमन करते हैं।' उन्होंने इसके साथ एक वीडियो भी शेयर किया। साथ ही पंजाबी में भी उन्होंने ट्वीट किया। 

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का ट्वीट

उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने ट्वीट कर कहा, 'आज गुरु गोविंद सिंह जी की जन्म जयंती के पावन अवसर पर पूज्य गुरु की स्मृति को सादर नमन करता हूं तथा देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन संदेश तथा उनके कृतित्व हमारे राष्ट्रीय, सामाजिक और निजी जीवन में आज भी अनुकरणीय हैं।'

अन्याय और अधर्म के खिलाफ लड़ने के लिए खुद को समर्पित किया- अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने अन्याय और अधर्म के खिलाफ लड़ने के लिए खुद को समर्पित किया। शाह ने ट्वीट करके कहा, 'गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व (जयंती) के अवसर पर, मैं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके चरणों में नमन करता हूं। दसवें सिख गुरु और खालसा पंथ के संस्थापक ने खुद को अन्याय और अधर्म के खिलाफ लड़ने के लिए समर्पित किया।

उनकी शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी- राजनाथ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 'श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा और अन्याय के खिलाफ लड़ने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने उदाहरण के साथ नेतृत्व किया और अनुकरणीय साहस दिखाया। उनकी शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। मैं उनकी जयंती पर उन्हें नमन करता हूं।'

नौ साल की उम्र में बने थे गुरु

गुरु गोविंद सिंह जी नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर के पुत्र थे और जब वे नौ साल के थे, तब उन्हें दसवें गुरु के रूप में चुना गया था। इसके बाद गुरु गोविंद सिंह ने पंजाब में आनंदपुर के पास तख्त श्री केशगढ़ साहिब में खालसा की स्थापना की। यह वह स्थान है जहां उन्होंने अपने पिता के साथ अपने जीवन का अधिकांश समय बिताया। होली के दिन होला मोहल्ला मनाने के लिए सिख प्रतिवर्ष इस स्थान पर एकत्रित होते हैं। सिख धर्म के लिए उनके योगदान को काफी याद किया जाता है।

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Posted By: Tanisk

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