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पिता का 'रौद्र' रूप: बेटे की जान पर आई तो काल से भिड़ गया 60 साल का बाप, हंसिया-भाले से किया तेंदुए का अंत

Published: Thu, 29 Jan 2026 10:50 PM (GMT+05:30)

गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में एक पिता के अदम्य साहस की कहानी ने पूरे इलाके में सुर्खियां बटोरी हैं। ...और पढ़ें

गुजरात के 60 वर्षीय व्यक्ति ने अपने बेटे की जान बचाने के लिए हंसिया और भाले से तेंदुए को मार डाला।

गुजरात के 60 वर्षीय व्यक्ति ने अपने बेटे की जान बचाने के लिए हंसिया और भाले से तेंदुए को मार डाला।

HighLights

  1. वन विभाग ने बाबूभाई और शार्दुल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई

  2. इस घटना में पिता और पुत्र दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में एक पिता के अदम्य साहस की कहानी ने पूरे इलाके में सुर्खियां बटोरी हैं। 60 वर्षीय किसान बाबूभाई नारनभाई वाजा ने अपने 27 वर्षीय बेटे शार्दुल की जान बचाने के लिए एक हिंसक तेंदुए से सीधे मुकाबला किया और घर में पड़े हंसिया व भाले से उसे मार गिराया। यह दिल दहला देने वाली घटना बुधवार रात (28 जनवरी 2026) को ऊना तहसील के गांगड़ा गांव के निकट वाड़ी क्षेत्र में उनके खेत वाले घर के बाहर हुई।

रात करीब 10 बजे बाबूभाई घर के बरामदे में बैठे थे, तभी अंधेरे का फायदा उठाकर एक तेंदुआ अचानक उन पर झपट पड़ा। उसने बाबूभाई के गले और हाथ पर जोरदार हमला किया। पिता की चीख सुनकर बेटा शार्दुल कमरे से बाहर दौड़ा आया। तेंदुए ने पिता को छोड़ दिया और बेटे पर टूट पड़ा, उसे जबड़ों में जकड़ लिया।

अपने बेटे को मौत के मुंह में फंसा देख बाबूभाई ने पास पड़े भाले और हंसिया उठाए और तेंदुए पर जोरदार हमला बोल दिया। काफी देर तक चले इस भयंकर संघर्ष में तेंदुआ बार-बार पलटवार करता रहा, लेकिन पिता ने हार नहीं मानी।

बाबूभाई ने बताया कि “मैं बरामदे में था, तेंदुआ आया और मेरा गला पकड़ लिया। मैंने बेटे को पुकारा। बेटा आया तो तेंदुए ने उसे पकड़ लिया। मैंने बचाने की कोशिश की, वह फिर मुझ पर आ गया। कई बार ऐसा हुआ। आखिरकार हंसिया से मारा और लाठी से पीटा, तब जाकर वह मर गया। बाद में वन विभाग को सूचना दी।”

इस लड़ाई में पिता और बेटे दोनों को गंभीर चोटें आईं। बाबूभाई के शरीर पर 50 से ज्यादा टांके लगे हैं, जबकि शार्दुल भी बुरी तरह जख्मी हुआ। दोनों को पहले ऊना के सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया। दोनों अभी चिकित्सकीय निगरानी में हैं।

घटना की सूचना पर वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। उन्होंने हमले में इस्तेमाल हथियार जब्त किए और तेंदुए के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। चूंकि तेंदुआ संरक्षित वन्यजीव है, इसलिए वन विभाग ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत बाबूभाई और शार्दुल के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।