GST में अगला बड़ा सुधार: नए वित्त वर्ष से शुरू हो सकता है ई-इनवायसिंग एप, कारोबारियों को मिल सकती है ऑडिट में छूट
अगले वित्त वर्ष से जीएसटी प्रक्रिया में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है, जिसमें ई-इनवायसिंग एप का बड़े पैमाने पर क्रियान्वयन होगा।

जीएसटीएन से जुड़कर राजस्व संग्रह में वृद्धि होगी

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जीएसटी प्रक्रिया में अगले वित्त वर्ष से एक बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। नए वित्त वर्ष में ई-इनवायसिंग को बड़े पैमाने पर लागू किया जाएगा और यह काम ई-इनवायसिंग एप के जरिए होगा।
हालांकि इस पर जीएसटी काउंसिल ही फैसला लेगा और उन्हीं राज्यों को ई-इनवायसिंग एप इस्तेमाल के लिए दिए जाएंगे जो केंद्र के इस प्रस्ताव से सहमत होंगे।
ई-इनवायसिंग एप से जुड़ेगा GST नेटवर्क
ई-इनवायसिंग एप जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) से जुड़ा होगा। इसका फायदा यह होगा कि दुकान में जेनरेट होने वाले ई-इनवायस का पूरा ब्योरा जीएसटीएन पर होगा।
वित्त मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक ई-इनवायसिंग का इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों को सरकार इंसेंटिव या अन्य तरीके से प्रोत्साहन दे सकती है। हो सकता है इस प्रकार के कारोबारियों को विभिन्न प्रकार की ऑडिटिंग से छूट दे दी जाए।
जीएसटीएन से जुड़े होने के कारण विभाग के पास भी कारोबारी की बिक्री की पूरी जानकारी होगी और कुछ गड़बड़ी की शंका होने पर ही कारोबारियों की जांच होगी।
ई-इनवायस से जुड़ने पर जीएसटी संग्रह भी बढ़ सकता है। हालांकि सूत्रों का यह भी कहना है कि ई-इनवायसिंग को अनिवार्य करने का प्रस्ताव नहीं लाया जाएगा। यह एक वैकल्पिक व्यवस्था हो सकती है।
आने वाले समय में सरकार बिजनेस टू कंज्यूमर (बीटूसी) प्रणाली को अधिक प्रोत्साहित करना चाहती है। जीएसटी काउंसिल में 33 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र सरकार की होती है।
कारोबारियों को मिल सकता है ऑडिट छूट
वित्त मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि जीएसटी काउंसिल की कोशिश अब दर बदलाव से अधिक आधार को बढ़ाने की होगी। क्योंकि आधार बढ़ने पर टैक्स कलेक्शन भी बढ़ेगा। आधार बढ़ाने के लिए ही काउंसिल की गत बैठक में पंजीयन और उसे रद करवाने की प्रणाली को आसान बनाया गया।
मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि पिछले साल सितंबर में दरों में बदलाव के बाद खाने-पीने की कई ऐसी चीजों की खपत बढ़ गई है जिन पर जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिश कर दिया गया।
12 प्रतिशत दर को पिछले साल समाप्त कर दिया गया था। सूत्रों का कहना है कि दरों में बदलाव का काम लगभग पूरा हो चुका है और आने वाले समय में काउंसिल की हर बैठक में जीएसटी दर पर चर्चा नहीं होगी। जरूरत पड़ी तो या फिर साल में एक बार दरों पर चर्चा की जा सकती है।
गत आठ अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़े भुगतान में तेजी और उनसे जुड़ी जटिलताओं के निपटान के लिए 12 राज्यों के अधिकारियों की कमेटी बनाई गई है।
इस कमेटी में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात जैसे पांच बड़े राज्य, चार मझोले श्रेणी के राज्य तो तीन छोटे राज्यों के अधिकारियों को शामिल किया गया है। यह कमेटी आईटीसी भुगतान को लेकर काउंसिल के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
