GST में बड़ा बदलाव: अब डंडे से नहीं बल्कि 'नज' अभियान से टैक्स कलेक्शन बढ़ाएगी सरकार, नया नियम इस दिन से होगा लागू!
GST New Rules: जीएसटी लागू होने के 9 साल बाद, सरकार अब टैक्सपेयर्स का दायरा बढ़ाने और नकद टैक्स कलेक्शन ...और पढ़ें
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GST टैक्सपेयर्स के काम की खबर! अब इंस्पेक्टर राज नहीं, डेटा एनालिसिस से होगी जांच; कब से लागू होगा नया नियम, किस पर पड़ेगा असर?

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| जीएसटी लागू होने के 9 साल बाद, अब सरकार का पूरा फोकस टैक्सपेयर्स का दायरा बढ़ाने और नकद यानी कैश टैक्स कलेक्शन (gst cash tax collection target) में इजाफा करने पर है। केंद्र और राज्य के जीएसटी अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे कर चोरी पकड़ने के लिए अब पुरानी सख्ती के बजाय आधुनिक डेटा एनालिसिस और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल करें।
सूत्रों के मुताबिक,
जीएसटी की दरें और प्रक्रियाएं अब काफी हद तक स्थिर हो चुकी हैं। इसलिए अधिकारियों का काम अब सिर्फ टैक्स वसूलना नहीं होगा, बल्कि वे कारोबारियों के लिए 'मददगार' की भूमिका निभाएंगे। अधिकारी अब टैक्सपेयर्स पर बेवजह दबाव डालने के बजाय 'सहयोगी रुख' अपनाएंगे ताकि उनके बीच भरोसा कायम किया जा सके।"
1 अप्रैल 2027 से लागू होगा B2C ई-बिल सिस्टम
जीएसटी को पारदर्शी बनाने के लिए सबसे बड़ा कदम 1 अप्रैल, 2027 से उठाया (gst new rules 1 april 2027) जाएगा। इसके तहत कंपनियों से सीधे उपभोक्ताओं (b2c e-billing system gst) के बीच होने वाले लेनदेन के लिए इलेक्ट्रॉनिक बिल (E-Bill) व्यवस्था लागू की जाएगी। शुरुआत में यह स्वैच्छिक (Voluntary) होगी। जीएसटी नेटवर्क (GSTN) राज्यों को इसे लागू करने के लिए पूरी तकनीकी मदद देगा।
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जीएसटी काउंसिल की बैठक में मिल चुकी हरी झंडी
अभी तक सिर्फ 5 करोड़ रुपए से ज्यादा के सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बिक्री पर ई-बिल बनाना अनिवार्य है। सितंबर 2024 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में B2C ई-बिल के पायलट प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिल चुकी है। इस सिस्टम के आने से सप्लायर से लेकर आखिरी खरीदार तक के लेनदेन का पूरा डेटा सरकार के पास होगा, जिससे कर चोरी लगभग नामुमकिन हो जाएगी।
इनकम टैक्स की तर्ज पर 'नज' अभियान
एक सूत्र ने बताया कि जीएसटी विभाग अब इनकम टैक्स के 'नज' (Nudge यानी प्यार से नियम मानने के लिए प्रेरित करना) अभियान की तर्ज पर काम करेगा। अधिकारियों से कहा गया है कि वे कारोबारियों के कामकाज में जरूरत से ज्यादा दखल न दें।
इसके बजाय, टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर कमियों का पता लगाएं और टैक्सपेयर्स को खुद नियम मानने के फायदे समझाएं। अधिकारियों के पास जब विस्तृत डेटा होगा, तो बिना वजह की पूछताछ और जांच से बचा जा सकेगा।
1.68 करोड़ व्यापारी रजिस्टर्ड, दायरा बढ़ाने की जरूरत
देश में फिलहाल करीब 1.68 करोड़ जीएसटी टैक्सपेयर्स रजिस्टर्ड हैं। केंद्र सरकार का मानना है कि इस संख्या को और बढ़ाया जा सकता है। इसलिए राज्यों से भी टैक्सपेयर्स का आधार बढ़ाने को कहा गया है।
इसके अलावा, अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना है कि कारोबारियों की कुल टैक्स देनदारी सिर्फ उनके इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के दावों से खत्म न हो जाए, बल्कि सरकार को नकद (कैश) टैक्स के रूप में भी राजस्व मिले।
कैसे बंटे हैं टैक्सपेयर्स?
जीएसटी में टैक्सपेयर्स का बंटवारा एक तय फॉर्मूले पर होता है। 1.5 करोड़ रुपए से कम सालाना टर्नओवर वाले 90 फीसदी व्यापारियों का प्रबंधन राज्य जीएसटी प्रशासन करता है, जबकि 10 फीसदी केंद्र के पास हैं। वहीं, 1.5 करोड़ रुपए से ज्यादा टर्नओवर वाले टैक्सपेयर्स को केंद्र और राज्य के बीच 50-50 फीसदी (बराबर) बांटा गया है।
बदलाव के इस नए दौर में नियमों में कुछ सुधार जल्द ही लागू किए जा सकते हैं, जिससे जीएसटी सिस्टम और भी स्मूथ हो जाएगा।
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