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ग्रीनलैंड विवाद: ट्रंप की टैरिफ धमकियों ने यूरोपियन देशों को हिलाया, अमेरिकी ट्रेड डील में भारत के लिए क्या सबक?

Published: Sun, 18 Jan 2026 08:55 PM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ग्रीनलैंड विवाद पर यूरोपीय संघ के देशों पर 10-25% टैरिफ लगाने की धमकी दी है। यह ...और पढ़ें

अमेरिकी ट्रेड डील में भारत के लिए क्या सबक? (फोटो सोर्स - गूगल जेमिनी)

अमेरिकी ट्रेड डील में भारत के लिए क्या सबक? (फोटो सोर्स - गूगल जेमिनी)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की यूरोपीयन यूनियन देशों पर टैरिफ लगाने की ताजा धमकी खुले तौर पर ग्रीनलैंड से जुड़ी हुई है, क्योंकि इन देशों ने डेनमार्क के उस फैसले के समर्थन किया है जिसमें उसने अमेरिका को उस इलाके पर कब्जा करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। यह भारत के लिए एक अहम चेतावनी और सबक है।

17 जनवरी, 2026 को ट्रंप ने डेनमार्क, नार्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम, नीदरलैंड और फिनलैंड से आने वाले सामानों पर 10 फीसदी इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का एलान किया है। ये टैरिफ एक फरवरी से लागू होने वाले हैं और एक जून से बढ़कर 25 फीसदी हो जाएंगे। हालांकि ये टैरिफ EU देशों के लिए हैं, लेकिन ट्रंप के तहत पॉलिसी में अनिश्चितता भारत के लिए एक याद दिलाती है, जो फिलहाल अमेरिका के साथ एक ट्रेड डील पर बातचीत कर रहा है।

भारत पहले से ही अपने एक्सपोर्ट पर 50 प्रतिशत टैरिफ का सामना कर रहा है। लेकिन ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार, ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय सहयोगियों पर टैरिफ लगाने का अमेरिकी फैसला एक ऐसी सच्चाई को दिखाता है जिसे भारत नजरअंदाज नहीं कर सकता। जब राजनीतिक फायदे के लिए आर्थिक उपायों का इस्तेमाल किया जाता है, तो अमेरिका के साथ ट्रेड डील कोई गारंटी वाली सुरक्षा नहीं देती।

ट्रंप ने क्या धमकी दी?

डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि सभी यूरोपीय यूनियन देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाए जाएंगे। यह आंकड़ा इस साल जून से बढ़कर 25 फीसदी हो जाएगा। ट्रंप अपनी पोस्ट में कहा, "हमने डेनमार्क, और यूरोपीय यूनियन के सभी देशों, और दूसरों को कई सालों तक टैरिफ, या किसी भी अन्य तरह के भुगतान न लेकर सब्सिडी दी है। अब, सदियों बाद, डेनमार्क के लिए वापस देने का समय आ गया है। विश्व शांति दांव पर है! चीन और रूस ग्रीनलैंड चाहते हैं, और डेनमार्क इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता।"

केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में, इस खेल में खेल सकता है, और वह भी बहुत सफलतापूर्वक! कोई भी इस पवित्र जमीन के टुकड़े को नहीं छुएगा, खासकर जब संयुक्त राज्य अमेरिका और पूरी दुनिया की राष्ट्रीय सुरक्षा दांव पर है।”

यूरोपीय नेताओं ने ट्रंप की चेतावनी के खिलाफ आग्रह किया। यूरोपीय संसद के एक वरिष्ठ जर्मन सदस्य ने कहा कि ताजा धमकी मिलने के बाद पिछले साल ईयू-यूएस व्यापार समझौते के भविष्य पर संदेह पैदा कर दिया है।

यूरोपीय आयोग की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा ने इन टिप्पणियों के कुछ घंटों बाद एक जॉइंट स्टेटमेंट जारी कर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम ट्रांसअटलांटिक संबंधों को कमजोर करेंगे और तनाव बढ़ने का एक खतरनाक सिलसिला शुरू कर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यूरोप मिलकर काम करेगा, एकजुट रहेगा और अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा।

भारत के लिए क्या सबक?

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अनुसार, ट्रंप की लगातार बदलती नीतियों और अनिश्चित व्यवहार में भारत के लिए सबक है। अजय श्रीवास्तव ने चेतावनी देते हुए कहा कि यूरोप का अनुभव जैसे कनाडा के साथ पहले किया गया व्यवहार और ऑस्ट्रेलिया की बाद की हेजिंग दिखाता है कि करीबी सहयोगी भी अचानक टैरिफ कार्रवाई से नहीं बच पाते हैं।"

उन्होंने कहा, "भारत ने पहले ही चाबहार से पीछे हटकर, एनर्जी इंपोर्ट में बदलाव करके और BRICS के अंदर जुड़ाव को सीमित करके कीमत चुकाई है, फिर भी उसे ट्रेड बातचीत में दबाव का सामना करना पड़ रहा है।"

अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत के लिए सबक साफ है कि नई दिल्ली को इस उम्मीद में रणनीतिक स्वायत्तता का सौदा नहीं करना चाहिए कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील स्थिरता सुनिश्चित करेगी। एक अस्थिर वैश्विक व्यवस्था में, संयम, विविधीकरण और संप्रभु निर्णय लेने का महत्व उन वादों से कहीं ज्यादा है जिन्हें रातों-रात वापस लिया जा सकता है।

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