'फार्मा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग पर रखी जाएगी नजर', सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने बनाई समिति
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने फार्मा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग पर नजर रखने के लिए नीति ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
माला दीक्षित, नई दिल्ली। फार्मा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग पर कड़ी नजर रखने और फार्मा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को किसी तरह के प्रलोभन पर रोक की तैयारी शुरू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने फार्मा कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों की समीक्षा और निगरानी के लिए नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर एम श्रीनिवास की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने गत आठ अक्टूबर के आदेश में केंद्र सरकार को दवा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग और उन्हें नियंत्रित करने वाली मौजूदा कानूनी या नियामक व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करने के लिए दो सप्ताह के भीतर समिति का गठित करने का निर्देश दिया था। केंद्र सरकार ने समिति के गठन का आदेश गत गुरुवार को जारी किया।
सिस्टम के प्रभावशीलता की करेगी जांच
यह समिति फार्मा कंपनियों की मार्केटिंग गतिविधियों और तौर-तरीकों को नियंत्रित करने वाले मौजूदा ढांचों की प्रभावशीलता की व्यापक समीक्षा करेगी और निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने के लिए उपयुक्त सिफारिशें करेगी। समिति के बाकी दो सदस्य पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन और मेदांता के सीएमडी डॉक्टर नरेश त्रेहन हैं।
समिति जिन विषयों पर विचार करेगी, उनमें फार्मा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग और उससे संबंधित सभी मुद्दों की समग्र एवं व्यापक समीक्षा करना शामिल है। फार्मा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग के संबंध में निगरानी, पर्यवेक्षण और नियमों को लागू करने के लिए मौजूदा तंत्रों की प्रभावशीलता की जांच की जाएगी।
अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपायों पर भी विचार किया जाएगा। यह समिति संबंधित हितधारकों, तकनीकी विशेषज्ञों, पेशेवर विशेषज्ञों तथा संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों, संस्थानों या निकायों के साथ जैसा आवश्यक समझेगी, विचार-विमर्श करेगी।
रिकार्ड पर रखेगी समिति की सिफारिशें
मामले की व्यापक समीक्षा करने के बाद उनके द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर विचार करते हुए अपनी सिफारिशें देगी। समिति अनैतिक मार्केटिंग पर अंकुश लगाने से संबंधित किसी अन्य मुद्दे पर भी विचार-विमर्श करेगी। समिति अपनी पहली बैठक की तिथि से दो महीने के भीतर औषधि विभाग को अपनी सिफारिशें देगी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपने के बाद केंद्र सरकार उन पर विचार करके जल्द फैसला लेगी। कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर समिति की सिफारिशें रिकार्ड पर रखेगी तथा उस पर लिए गए निर्णय से कोर्ट को अवगत कराएगी। सुप्रीम कोर्ट 29 जनवरी, 2027 को फिर सुनवाई करेगा।
कोर्ट में फेडरेशन आफ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव एसोसिएशन ऑफ इंडिया की याचिका लंबित है। इसमें अनुरोध किया गया है कि प्रभावी कानून बनने तक कोर्ट फार्मा कंपनियों की अनैतिक मार्केटिंग पर नियंत्रण और नियमन के लिए दिशा-निर्देश तय करे। याचिकाकर्ता का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में असमानता है।
इसके तहत ऐसे प्रलोभन स्वीकार करने वाले डॉक्टरों के लिए कार्रवाई का प्रविधान तो है, लेकिन उन्हें प्रलोभन देने वाली दवा कंपनियों को नियंत्रित करने या दंडित करने के लिए समान वैधानिक व्यवस्था नहीं है।
आरोप लगाया गया है कि फार्मा कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार के लिए चिकित्सकों को महंगे गिफ्ट व अन्य कई तरह के लाभ प्रदान करती हैं। आखिरकार इसका असर मरीज पर पड़ता है और उन्हें महंगी दवाएं खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
