जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली । नोटबंदी जैसा साहसिक कदम उठाने के बाद सरकार को आयकरदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए असंगठित क्षेत्र पर फोकस करना होगा। यह ऐसा क्षेत्र है जिसमें बहुत से लोग कर देने से बच निकलते हैं। संसद की वित्त मामलों संबंधी समिति ने भी सरकार को करदाता आधार बढ़ाने के लिए इसी क्षेत्र पर ध्यान देने को कहा है।

आयकरदाताओं की संख्या बढ़ाना इसलिए जरूरी है क्योंकि फिलहाल देश में इनकी संख्या सिर्फ 5.37 करोड़ है जो कि देश की 125 करोड़ आबादी का मात्र 4.3 प्रतिशत है। इसमें से 3.7 करोड़ व्यक्तिगत करदाता हैं। व्यक्तिगत करदाताओं में करीब एक करोड़ आयकरदाता ऐसे हैं जो अपनी आय ढाई लाख से कम दिखाते हैं। सिर्फ 76 लाख लोग ऐसे हैं जो अपनी सालाना आय पांच लाख रुपये से अधिक दिखाते हैं। इसमें से 56 लाख लोग ऐसे हैं जिनकी यह आय वेतन से होती है। इस तरह मात्र 20 लाख लोग ही ऐसे हैं जो अपने व्यवसाय या पेशे से इतनी आय दिखाते हैं।

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सूत्रों ने कहा कि नोटबंदी के जिस तरह डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दिया जा रहा है उससे असंगठित क्षेत्र के लोग भी कर प्रणाली के दायरे में आएंगे। इसके अलावा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने नोटबंदी के दौरान जमा राशि के आंकड़ों का विश्लेषण किया है जिसके आधार पर नए लोगों के आयकर के दायरे में आने की उम्मीद है। बहरहाल सरकार को करदाताओं की संख्या बढ़ाने को असंगठित क्षेत्र पर फोकस बनाए रखना होगा।

पूर्ववर्ती सरकारों ने करदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए जो भी उपाय किए हैं वे अपर्याप्त साबित हुए हैं। कर प्रशासन सुधार आयोग की रिपोर्ट मंे भी इस ओर ध्यान दिलाया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि वित्त वर्ष 2002-03 से 2012-13 के दौरान दस साल में आयकर संग्रह में 700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि करदाताओं की संख्या मात्र 35 प्रतिशत बढ़ी है। इस अवधि में प्रत्यक्ष कर संग्रह 69,198 करोड़ रुपये से बढ़कर 5.58 लाख करोड़ रुपये हुआ है जबकि करदाताओं की संख्या में में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

सोलहवीं लोक सभा में भी वित्त मामलों संबंधी संसद की स्थायी समिति का कहना है कि सरकार को आयकरदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए असंगठित क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। यह ऐसा क्षेत्र है बहुत से लोग अब भी कर के दायरे से बाहर हैं।

Posted By: Sachin Bajpai

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