नई दिल्ली, पीटीआइ। सरकार ने लोकसभा में बताया है कि तीनों सेनाओं में 1.35 लाख अफसरों की कमी चल रही है। इसमें भी अकेले थलसेना में 1.18 रिक्तियां हैं। रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने शुक्रवार को लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि इसी साल 30 सितंबर तक नौसेना में 11,587 भारतीय नौसैनिकों की कमी है। इसी तरह भारतीय वायुसेना में भी बहुत से पद भरे नहीं जा सके हैं। एक नवंबर,2022 तक 5,819 एयरमैन और नान-कंबैटेंट के पद रिक्त हैं। सेना में एक जुलाई तक लाखों रिक्तियां हैं।

जूनियर कमीशंड अफसरों और अन्य रैंकों के लिए 40 हजार रिक्तियों के विज्ञापन निकाले गए हैं। इस साल भारतीय नौसेना के लिए अग्निवीरों की तीन हजार रिक्तियां निकाली गई हैं। इसी तरह वायुसेना के लिए अग्निवीर वायु के भी तीन हजार पदों के विज्ञापन दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जवानों की भर्तियां अग्निवीरों की भर्तियों के जरिए ही हो रही हैं। अग्निपथ योजना के तहत हर साल तीनों सेनाओं में औसतन 60 हजार रिक्तियां निकाली गई हैं। उन्होंने बताया कि दो साल से अधिक समय तक कोविड के कारण भर्तियों पर रोक के चलते भारतीय सेना में 1,08,685 जवानों की कमी हो गई है।

यूक्रेन में अभी भी 1100 भारतीय छात्र मौजूद

विदेश राज्य मंत्री मीनात्री लेखी ने बताया कि यूक्रेन में अभी भी करीब 1,100 भारतीय छात्र मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि विगत 25 अक्टूबर को कीव स्थित भारतीय दूतावास ने एक एडवाइजरी जारी करते हुए सभी भारतीय नागरिकों को तत्काल यूक्रेन छोड़ने को कहा था। युद्धग्रस्त यूक्रेन में ज्यादातर भारतीय छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय राजनयिक भारतीय छात्रों के संपर्क में हैं। उन्होंने बताया कि साढ़े 22 हजार भारतीय नागरिक यूक्रेन से वापस भारत लौट आए हैं। सरकार ने इन नागरिकों को सुरक्षित देश वापस लाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि आपरेशन गंगा के तहत 90 भारतीय विमान इन छात्रों को वापस लेकर आए हैं। युद्ध शुरू होने के बाद करीब बीस हजार भारतीय छात्र यूक्रेन में फंस गए थे।

4.18 करोड़ अस्पतालों में 48,934.9 करोड़ का स्वास्थ्य बीमा

स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने लोकसभा में बताया कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाइ) के जरिये सरकार ने करीब 4.18 करोड़ अस्पतालों में लोगों का करीब 48,934.9 करोड़ रुपये का स्वास्थ्य बीमा कराया है। इस लक्ष्य को चार दिसंबर तक 11,700 निजी अस्पतालों समेत 26,267 स्वास्थ्य सेवा प्रदात्ताओं के जरिये प्रदान किया गया है। उन्होंने कहा कि लोग निजी अस्पतालों की अनदेखी के कारण पूरी तरह से एबी-पीएमजेएवाइ का लाभ नहीं उठा पा रहे थे। इसलिए सरकार ने मोबाइल एप्लीकेशन और शिकायत वेब पोर्टल के जरिये ऐसे अस्पतालों की शिकायत करने की व्यवस्था की है।

अक्टूबर तक पौने दो लाख भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी

पिछले कुछ सालों में बड़ी तादाद में भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी है। वर्ष 2017 से लेकर इस साल 31 अक्टूबर तक कुल 1,83,741 भारतीयों ने अपने भारतीय पासपोर्ट को छोड़ दिया है। वर्ष 2017 में ही 1,33,049 लोगों ने भारत की नागरिकता को तिलांजलि दे दी थी। विदेश मंत्रालय के राज्य मंत्री वी मुरालीधरन ने एक लिखित जवाब में बताया कि पिछले कुछ सालों में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए विदेशियों ने भारतीय नागरिकता हासिल कर ली है। इसमें से 93 विदेशी (2015) में, 153 (2016), 175 (2017), 129 (2018), 113 (2019), 27 (2020), 42 (2021) और 60 (2022) में भारतीय नागरिक बने।

मोदी सरकार ने पासपोर्ट सेवा को 500 प्रतिशत सुधारा

विदेश राज्यमंत्री वी मुरालीधरन ने लोकसभा में बताया कि मोदी सरकार ने वर्ष 2014 से सत्ता में आने के बाद देश की पासपोर्ट सेवाओं में 500 प्रतिशत सुधार किया है। मंत्रालय द्रुत गति से पासपोर्ट जारी करने पर लगातार काम कर रहा है। 3.2 करोड़ भारतीयों या विदेश में बसे भारतीय मूल के लोगों के लिए मंत्रालय अपनी सभी सेवाएं देता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से पहले सभी पासपोर्ट कार्यालय 110 पासपोर्ट आवेदनों का निस्तारण करते थे। वही कार्यालय अब 550 से अधिक पासपोर्टों को जारी करते हैं। मंत्रालय ने इसी साल जून से 234 पासपोर्ट मेले लगाएं हैं। ऐसा इसलिए ताकि पासपोर्ट का आवेदन करने वालों को निराश न होना पड़े।

पांच सालों में 3,936 भारतीय मछुआरे विदेश में कैद

विदेश मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि पिछले पांच सालों में कुल 3,936 भारतीय मछुआरों को विदेशी जेलों में बंद कर दिया गया है। उनके साथ ही उनकी 468 नावों को भी जब्त किया गया है। गलती से दूसरे देशों के जल क्षेत्र में पहुंचने वाले इन मछुआरों पर अवैध तरीके से मछली पकड़ने, अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

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Edited By: Devshanker Chovdhary

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