नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाले परीक्षा सुधार पैनल का कार्यकाल जनवरी तक बढ़ा, केंद्र सरकार का बड़ा फैसला
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, टास्क फोर्स को पहले अक्टूबर के अंत तक रिपोर्ट जमा करने को कहा गया था। अब ...और पढ़ें

नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाले परीक्षा सुधार पैनल का कार्यकाल जनवरी तक बढ़ा
HighLights
टास्क फोर्स को पहले अक्टूबर के अंत तक रिपोर्ट जमा करने को कहा गया था
पीएमओ चाहता है कि यह विभिन्न क्षेत्रों की चुनौतियों पर राज्यों के नेतृत्व से राय ले
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने परीक्षा सुधारों पर गठित नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले टास्क फोर्स का कार्यकाल जनवरी 2027 तक बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने पैनल से सिफारिशें अंतिम रूप देने से पहले मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों से परामर्श करने को कहा है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, टास्क फोर्स को पहले अक्टूबर के अंत तक रिपोर्ट जमा करने को कहा गया था। अब पीएमओ चाहता है कि यह विभिन्न क्षेत्रों की चुनौतियों पर राज्यों के नेतृत्व से राय ले।
इसका उद्देश्य टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और प्रशासनिक तैयारी में क्षेत्रीय असमानताओं को बेहतर ढंग से समझना और राज्य-विशिष्ट चिंताओं को व्यापक परीक्षा सुधार रोडमैप में शामिल करना है।
कुछ हितधारकों और विशेषज्ञों ने नीट-यूजी 2027 के लिए हाइब्रिड फॉर्मेट का सुझाव भी दिया है। इससे 2028 में पूरी तरह कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग (सीबीटी) पर जाने से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार का समय मिल सकेगा।
टास्क फोर्स की सिफारिशों में एक अन्य प्रस्ताव देशभर में सीबीटी सेंटरों का नेटवर्क बनाने का है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारें निजी निवेश के साथ मिलकर काम करेंगी।
इससे सरकार की निगरानी बढ़ेगी और निजी पूंजी जुटाकर खासकर उन जिलों में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा सकेगा जहां सुरक्षित और सुसज्जित सेंटर नहीं हैं। फंडिंग, स्वामित्व और संचालन के इंतजाम तय करने होंगे।
ऐसे सेंटर सुरक्षा मानकों, विश्वसनीय कनेक्टिविटी और मेट्रो शहरों के बाहर के उम्मीदवारों के लिए बेहतर पहुंच सुनिश्चित कर सकते हैं।
टास्क फोर्स परीक्षा जिम्मेदारियों को अलग-अलग करने (डिबंडलिंग) को प्राथमिकता दे रहा है। प्रस्ताव के तहत प्रश्न पत्र तैयार करना, परीक्षा आयोजन, टेस्ट सेंटर प्रबंधन और सुरक्षा अलग-अलग एजेंसियों को सौंपी जाएगी। इससे जवाबदेही साफ होगी और एक हिस्से में गड़बड़ी से पूरी परीक्षा प्रभावित होने का जोखिम कम होगा। हालांकि, अलग-अलग एजेंसियों के बीच समन्वय जरूरी होगा।
पैनल हर जिले में परीक्षा केंद्र बनाने और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए), स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एसएससी), इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन (आईबीपीएस) और रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) के लिए कॉमन कैलेंडर पर भी विचार कर रहा है। इससे छात्रों और नौकरी चाहने वालों को परीक्षा तारीखों का टकराव नहीं होगा और इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
यह छह सदस्यीय टास्क फोर्स जुलाई में नीट-यूजी 2026 विवाद के बाद गठित किया गया था, जिसमें मूल परीक्षा रद्द कर री-टेस्ट कराया गया था। इसने 18 आंतरिक बैठकें और करीब 40 परामर्श किए हैं तथा जनता से भी सुझाव मांगे हैं। अक्टूबर की एक संसदीय समिति की रिपोर्ट में भी जिलों में सुरक्षित सरकारी नियंत्रित टेस्टिंग सेंटर और नीट-यूजी के लिए सीबीटी में चरणबद्ध बदलाव की सिफारिश की गई थी।