दलहन-तिलहन किसानों के लिए केंद्र का बड़ा फैसला, MSP से नीचे गिरा भाव तो सीधे मंडी में उतरेगी सरकार
सरकार दलहन-तिलहन किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे उपज बेचने की मजबूरी से बचाने के लिए खरीद व्यवस्था ...और पढ़ें

एमएसपी से नीचे दाम पर सरकार सीधे मंडियों से खरीद करेगी।
HighLights
एमएसपी से नीचे दाम पर सरकार सीधे मंडियों से खरीद करेगी।
नेफेड और एनसीसीएफ बिना राज्य के अनुरोध के हस्तक्षेप करेंगे।
किसानों को नुकसान से बचाने और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दलहन-तिलहन किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे उपज बेचने की मजबूरी से बचाने के लिए सरकार खरीद व्यवस्था में बदलाव करने जा रही है। बाजार भाव एमएसपी से नीचे आते ही नेफेड और एनसीसीएफ राज्यों की खरीद प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार किए बिना सीधे मंडियों में उतरकर किसानों से खरीद करेंगी।
फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों को बाजार में मूल्य गिरने से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए यह नई रणनीति है।अभी दलहन-तिलहन की एमएसपी पर खरीद प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की मूल्य समर्थन योजना के तहत होती है। संबंधित राज्य के अनुरोध के बाद केंद्रीय एजेंसियां खरीद शुरू करती हैं।
ऐसे में बाजार भाव गिरने एवं सरकारी खरीद शुरू होने के बीच कुछ समय का अंतर रह जाता है। सरकार अब इस फासले को मिटाने के प्रयास में है, ताकि किसानों को मजबूरी में एमएसपी से कम कीमत पर उपज न बेचनी पड़े।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नेफेड और एनसीसीएफ को निर्देश दिया है कि जिन फसलों का बाजार भाव एमएसपी से नीचे हो जाए, उनकी समय पर खरीद के लिए जिला स्तर पर उत्पादन, मंडी आवक एवं भंडारण क्षमता का पहले से आकलन कर लिया जाए। यानी फसल मंडी में आने के पहले ही खरीद की सारी तैयारी कर ली जाए।
इसका बड़ा लाभ दलहन-तिलहन किसानों को मिल सकता है। धान-गेहूं की तुलना में इन फसलों के लिए सरकारी खरीद का नेटवर्क सीमित है। मंडियों में एक साथ बड़ी आवक होने पर कीमतों पर दबाव बढ़ता है और किसान को तुरंत बिक्री की जरूरत के कारण कम भाव स्वीकार करना पड़ता है।बिहार में मसूर की सरकारी खरीद और छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों के माध्यम से खरीद केंद्रों का विस्तार इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
इन राज्यों में नेफेड ने भी कुछ नए खरीद केंद्र खोले हैं। अन्य राज्यों में विस्तार की तैयारी है। दरअसल, सरकार 2030-31 तक दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना चाहती है। अभी दलहन-तिलहन की सरकारी खरीद के लिए उत्पादन के 25 प्रतिशत तक सीमा का प्रविधान है।
हालांकि तूर, उड़द एवं मसूर की पूरी उपज खरीदने की व्यवस्था की गई है। तिलहन में मूल्य अंतर भुगतान का विकल्प भी है। इसमें एमएसपी और मंडी भाव के बीच का अंतर किसान को दिया जाता है।
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